धर्मधारा


सर्व सामान्य व्यक्तिकी धनपर अधिक आस्था होती है इसलिए वह आपातकालके लिए धन एकत्रित करता है। साधककी ईश्वरपर अधिक आस्था होती है इसलिए वह धनके स्थानपर ईश्वरपर अधिक श्रद्धा होती है; इसलिए आपातकाल हेतु ईश्वरीय कृपाका संचय करनेका प्रयास करता है।



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