१. कुछ व्यक्ति कहते हैं कि नामजपके लिए समय ही नहीं मिलता है, ऐसे लोग शारीरिक कार्य करते समय बोलकर या बुदबुदाकर नामजप कर सकते हैं । सामान्यत: सभी व्यक्ति तीनसे चार घंटे कोई न कोई शारीरिक कार्य तो करता ही है । यह समय वह नामजपके लिए उपयोग कर सकता है । जैसे प्रातः या संध्या समय सैर करते या भोजन बनाते समय, भाजी-तरकारी लेने हेतु या बच्चोंको विद्यालयमें छोडने जाते समय, अपने घर या कक्षकी स्वच्छता करते या स्नानादि कृत्य करते समय या कार्यालयसे आते या जाते समय कोई भी व्यक्ति नामजप कर सकता है; अतः अपने दिनचर्याकी सूची बनाएं, उसमें आप शारीरिक कार्य करनेवाली कृत्योंको एक कागदपर (कागज उर्दू शब्द है; अतः तमोगुणी है) लिखकर उसे अपने शयनकक्षमें चिपका दें एवं प्रतिदिन अपने दिनचर्याके मध्य होनेवाले वैखरी वाणीके नामजपकी समीक्षा करें ! इसप्रकारके प्रयाससे आपका नामजप होने लगेगा ।
२. किसी संत या उन्नत साधककी वाणीमें ध्वनिमुद्रित नामजपको भी आप लगाकर सुनें और उसके साथ करें । इससे भी वैखरी वाणीमें ही सही नामजप आरम्भ हो जाएगा ।
३. कुछ साधक, जिन्हें अनिष्ट शक्तियोंका तीव्र कष्ट होता है, उन्हें नामजप आरम्भ करते ही नींद आने लगती है या नामजप बैठकर करनेका मन नहीं करता है, ऐसे साधक भी खडे होकर या टहलते हुए वैखरी वाणीका नामजप करें ।
सदैव ध्यानमें रखें, नामजप नहीं करनेकी अपेक्षा वैखरी वाणीमें नामजप करना सर्वोत्तम होता है ।
४. वैखरी वाणीमें नामजप करनेसे नामजपका अभ्यास आरम्भ हो जाता है । आपने तो देखा ही होगा बालवाडीमें या शिशु विहारमें हमें अक्षर या पहाडे बार-बार रटवाए जाते हैं; क्योंकि शास्त्र यही है कि यदि किसी भी तथ्यको अंतर्मनमें अंकित करना हो तो उसे बोलकर समरण करना सर्वधिक सरल माध्यम है । अंतर्मनमें नामजपके संस्कार अंकित करने हेतु वैखरी वाणीमें नामजप आरम्भ करना यह सर्वाधिक सरल उपाय है । – तनुजा ठाकुर (क्रमश:)
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