जितनी सरलतासे सभी दुर्जन प्रवृत्तिके व्यक्ति अपनी स्वार्थसिद्धि हेतु एकत्रित होते हैं, उतने ही मनोयोगसे यदि सज्जन राष्ट्र और धर्मके उत्थान हेतु संगठित हो तो इस देशका भविष्य परिवर्तित होनेमें समय नहीं लगेगा ! वस्तुत: सज्जनोंकी निष्क्रियता एवं एक साथ आकर कार्य न कर पानेेकी प्रवृत्तिके कारण ही आज इस देशकी यह दुर्दशा हुई है ।
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