आजके पापी, राष्ट्रद्रोही भ्रष्ट एवं येन-केन-प्रकारेण सत्ता प्राप्त करनेवालोंका परिणाम क्या होता है, इस विषयमें महात्मा विदुरजीका यह सुवचन पठनीय है।
एकः पापानि कुरुते फलं भुङ्क्ते महाजनः।
भोक्तारो विप्र मुच्यन्ते कर्ता दोषेन लिप्यते ।। – विदुर नीति
अर्थ : यदि नायक (नेता) अकेला ही कोई पाप करता है तो उसका सारा फल राष्ट्र भोगता है , भोगनेवाले तो मुक्त हो जाते हैं , परन्तु कर्ता, पापमें लिप्त हो जाता हैं उसे चिरकाल तक राष्ट्रद्रोहीके रूपमें कुप्रसिद्धि प्राप्त होती है। अर्थात् मूढ कुकर्मी राजनेता सोचते हैं कि उनके पापोंके दण्डसे वे बच जाएंगे किन्तु ऐसा है नहीं ! इस सृष्टिके कर्मफल न्यायके सिद्धान्त अनुसार पापीको सदैव ही फल भोगना पडता है; किन्तु यदि वह समष्टि पाप करता है तो इस लोक और परलोक दोनोंमें उसे कठोर दण्ड भोगना पडता है -तनुजा ठाकुर
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