धर्मधारा


कुछ साधक स्वयं प्रेरित होकर प्रतिदन १५  या २० चूकें लिखते हैं; किन्तु यदि कोई उनकी एक चूक बता दे तो उसे वे स्वीकार नहीं कर पाते हैं; और तुरन्त प्रतिक्रिया देते हैं । ऐसे साधकोंको यह ध्यानमें रखना चाहिए कि उनमें अहंका प्रमाण अधिक है; अतः उन्होंने प्रतिदिन अपने आस-पासके सदस्योंसे चूकें पूछकर लेनी चाहिए और साथ ही अहम् निर्मूलन हेतु प्रयास करना चाहिए अन्यथा चूकें लिखते रहनेसे कोई विशेष लाभ नहीं होनेवाला है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution