सीमापार गोलाबारीमें २ जवान शहीद, घुसपैठके समय आतंकी मारा गया; बीएसएफने कहा- ‘पाक विश्वास योग्य नहीं’


जम्मू-कश्मीरमें संघर्षविरामपर मानने के ४ दिन बाद पाकिस्तानने शनिवार रात फिर सीमापर गोलाबारी की । बीएसएफकी अग्रिम चौकियोंके साथ निवास स्थानोंको निशाना बनाया । गोलीबारीमें दो जवान शहीद हो गए। उधर, कुपवाडामें घुसपैठके समय एक आतंकीको सुरक्षा बलोंने मार दिया । रविवारको बीएसएफके आईजीने कहा कि पाकिस्तानने फिर सिद्ध कर दिया है कि वह विश्वास योग्य नहीं है । इसकी कथनी और करनीमें बडा अन्तर है। भारतने पाकिस्तानके कृत्यका प्रत्युत्तर दिया। कुछ दिनोंमें पता लगेगा कि उन्हें कितनी हानि हुई । बता दें कि पिछले सप्ताह ही दोनों देशोंके मध्य सीमापर शान्ति बनाए रखनेको लेकर सहमति बनी थी ।

समाचार विभागके अनुसार, जम्मूमें बीएसएफके आईजी राम अवतारने बताया कि पाक रेंजर्सने हमारी अग्रिम चौकियोंको निशाना बनाया । एएसआई सत्य नारायण यादव और कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे सीमा पारसे हुई गोलीबारीमें शहीद हुए। दोनों उत्तर प्रदेशके रहने वाले थे। इसके अतिरिक्त अखनूर, कानचक और खौर क्षेत्रमें साधारण नागिरकोंको निशाना बनाया। १३ लोग चोटिल हुए हैं ।

भारत और पाकिस्तानके मध्य २९ मईको डीजीएमओ स्तरकी वार्ता हुई थी। इसमें २००३ के संघर्षविरामके अनुसार सीमापर शान्ति बनाए रखनेेके लिए सहमति भी बनी थी। अब पुनः सिद्ध हो गया कि पाकिस्तानकी कथनी और करनी में अन्तर है ।

आईजी राम अवतारके अनुसार, पाकिस्तानने शनिवार रात १.१५ बजेसे गोलीबारी आरम्भ की। भारतीय जवानोंने भी इसका प्रत्युत्तर दिया। पाकिस्तानमें कितनी हानि हुई, यह कुछ दिनोंमें पता चलेगा।

हालांकि, हम पाकिस्तानकी तरह साधारण नागरिकोंपर आक्रमण नहीं करते हैं। भारतकी ओर से केवल उन क्षेत्रोंको निशाना बनाया जाता है, जहां से हमपर गोलाबारी हो रही होती है।

डीजीएमओ स्तरकी वार्ताके बाद पाकिस्तानकी ओरसे कहा गया था कि सीमापर रहने वाले आम नागरिकोंकी परेशानीको देखते हुए दोनों सेनाओंके मध्य संघर्ष विरामको सख्तीसे लागू करनेपर सहमति बनी है ।

मेजर जनरल जीडी बख्शीकी मानें तो संघर्ष विराम करने को लेकर पाकिस्तानका इतिहास काफी खराब है। इसी वर्ष पाकिस्तानने ९०८ बार संघर्ष विरामका उल्लंघन किया है, जिसमें सेनाके २० जवानों सहित ४५ लोगोंके प्राण जा चुके हैं ।

– २०१७ में भी पाकिस्तान ८६९ बार संघर्ष विरामका उल्लंघन कर चुका है।

– “२००३ में भारतीय तोपोंकी गोलीबारीसे भयभीत पाकने संघर्ष विरामकी मांग की थी। इसके बाद दोनों देशोंके मध्य २५ नवम्बर २००३ की आधी रातको संघर्षविराम लागू हुआ।



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