आजीवन अहोरात्र (दिन-रात) मात्र सांसारिक वस्तुओंको स्मरण करनेवाला व्यक्ति, मृत्युके क्षणमें, ईश्वरका नाम अनेक प्रयासकर भी नहीं ले सकता; अतः मृत्युके समय नामजप हो, इस हेतु नामजप अधिकसे अधिक समय करना चाहिए ! ध्यान रहे, ‘अन्त मति सो गति’ |
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