धर्मधारा


भाजपा अगले चुनावमें विकासको मुख्य केन्द्र बिन्दु बनाएगी, यह भाजपाके एक प्रमुख नेताने कहा है | राजसत्ता टिकाए रखने हेतु विकास नहीं, धर्मका आधार लेना चाहिए ! विकासके मापदण्ड सदैव परिवर्तित होते रहते हैं; अतः यह एक अस्थिर घटक होता है | सत्ताको स्थिर और सशक्त रखनेके लिए शाश्वत धर्मका आधार लेना चाहिए ! किन्तु धर्मशिक्षणके अभावमें सनातन धर्मका क्या महत्त्व है ?,  यह आज अधिकांश राजकीय पक्षोंको ज्ञात नहीं है; इसलिए प्रत्येक पांच वर्ष उन्हें सत्ता बचाए रखने हेतु नित्य नूतन हथकण्डे अपनाने पडते हैं | जिस धर्मका आधार लेकर प्रभु श्रीरामने १४००० वर्ष राज्य किया, यदि भाजपाने उनकी जन्मस्थलीमें राममन्दिर ही अपने इस कार्यकालमें बना दिया होता तो अगले २५ वर्षके लिए उसे कोई सत्ताच्युत नहीं कर सकता था; किन्तु देख लें, विकासका परिणाम, लोकसभामें भाजपाकी संख्या दिन प्रति दिन घटती जा रही है ! अभी भी समय है, धर्म अधिष्ठित राज्य करें अन्यथा आनेवाले कालमें कहीं पछताना न पडे !


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