एक स्त्री साधिकाने कहा, ‘‘आपने मेरे पतिका आध्यात्मिक स्तर ५०% बताया है; किन्तु उनकी एक कृति उनके आध्यात्मिक स्तर अनुरूप नहीं दिखाई देती है !’’ मैंने कहा, “आपको ही क्यों, मुझे भी बहुत आश्चर्य होने लगा था और मेरे लिए तो यह आध्यात्मिक शोधका विषय बन चुका है ।’’ ६०% आध्यात्मिक स्तरवाले व्यक्तिको कुछ स्मरण नहीं रहता (विशेषकर जो आधुनिकताके रंगमें रंगे है या विदेशमें रहते है), ५६% वाले व्यसनाधीन होते हैं (कुछ अच्छे स्तरके सङ्गीततज्ञ, गायक, अभिनेता या जन्म ब्राह्मणोंमें मैंने यह पाया है), ५४% प्रतिशतवाले वासनामें लिप्त रहते हैं ( कुछ ५० वर्षसे अधिक आयुकी स्त्रियोंने अपने पतिके विषयमें मुझसे यह बात कही है), ५२% वालेको धर्मकार्यके लिए समय नहीं होता (यह मैंने स्वयं अनुभव किया है); क्योंकि उनकी भोग करनेकी वृत्तिमें विघ्न पडता है ! ५०% प्रतिशत वालेसे नामजप नहीं होता है और दस वर्षोंसे साधना करनेवालेको सत्त्व, रज, तम क्या है ?, यह समझमें नहीं आता है ! यह सब देखकर, मैं स्वयं हतप्रभ हो गई थी और उसके पश्चात मैंने शोध करना आरभ किया; क्योंकि वासनान्धता, स्मरणहीनता, व्यसनाधीनता, भोगलिप्सा, ये सब ५०% प्रतिशतके पश्चात या तो होने ही नहीं चाहिए या अत्यधिक न्यून हो जाने चाहिए; किन्तु आज सभीके घरोंमें इतना अधिक अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है कि इनसे उच्च स्तरके साधक भी अछूते नहीं हैं ! सबसे दुःखकी बात यह है कि अधिकांश पुरुषोंको भिन्न प्रकारसे मनोरोग हो रहे हैं, स्त्रियोंमें भावनाएं अधिक होती है; अतः उनका मन उतना दृढ नहीं होता; किन्तु पुरुष वर्गमें और वह भी ४० से ४९% वालोंमें मनोरोगका बढना यह समाजके लिए घातक है !
अनिष्ट शक्तियोंने सुनियोजित ढंगसे अच्छे स्तरके साधकोंपर अपना नियन्त्रण बहुत समय पूर्वसे करना आरम्भ कर दिया था (जब वे गर्भमें होते थे, तबसे), वस्तुतः दो पीढीसे हमारे घरके सदस्योंने जो साधना और धर्माचरणका आधुनिकीकरण एवं धर्मशिक्षाके अभावमें जो तिलांजलि दे दी है, यह सब इसीका परिणाम है; इसीलिए मैं आजके सभी ६० वर्षके आयुसे अधिक व्यक्तिको कहती हूं कि आपकी अगली पीढीमें तेजस्विता लाने हेतु किसी गुरु या सन्तके आश्रममें जाकर पूर्ण समय साधना करें ! और उच्च स्तरके साधकोंको अपने मन एवं बुद्धिपर आवरण दूर करने हेतु योग्य आध्यात्मिक उपचार तथा दोष निर्मूलन करना चाहिए और माता-पिताने अपने होनेवाली सन्तानोंपर गर्भकालसे साधना और धर्मका संस्कार डालने चाहिए ।
Leave a Reply