वर्तमान अराजक कालमें स्त्रियां अपने कुटुम्बके पुरुषोंके सङ्ग रहकर भी दुराचारी पुरुषोंसे सुरक्षित नहीं !
रामराज्यमें स्त्रियां अर्धरात्रिमें भी सारे आभूषण डालकर किसी निर्जन स्थानमें अकेले निर्भीक होकर कहीं भी आ -जा सकती थीं; किन्तु आज तो स्त्रियां यदि अपने कुटुम्बके पुरुष सदस्योंके साथ भी कहीं बाहर जाए तो दुराचारियोंद्वारा आघात होनेपर उस घरके पुरुष, उनका रक्षण करनेमें असमर्थ रहते हैं और इस प्रकार स्त्रीका शील सुरक्षित रहेगा, इसकी कोई प्रतिभूति (गारण्टी) नहीं है; क्योंकि आजके दुराचारी पुरुषोंका मनोबल इतना बढ गया है कि वे स्त्रीके साथ जो भी कुटुम्बके पुरुष सदस्य हों, उनपर आघात कर उनके समक्ष ही उनकी मां-बहन-पुत्रीका बलात्कार करते हैं । स्त्रियोंका शील रक्षण करनेमें असमर्थ हो, ऐसी राष्ट्रीय और सामाजिक व्यवस्थाका क्या औचित्य है ?; अपितु इस व्यवस्थाको परिवर्तित कर, नारी सम्मानका पोषण करनेवाले हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अनिवार्य हो गया है ।
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