‘अब्दुलकलाम’की भांंति ‘इफ्तार’ भोजपर करदाताओंका पैसा व्यय नहीं करेंगे राष्ट्रपति कोविन्द


जून ६, २०१८

राष्ट्रपति भवनमें इस बार ‘इफ्तार’का भोज नहीं होगा !राष्ट्रपति भवनके ‘प्रेस’ सचिव अशोक मलिकने सञ्चार माध्यमको (मीडिया) बताया कि राष्ट्रपति कोविन्दने निर्णय किया है कि करदाताओंकी पूञ्जीको अपव्यय सही नहीं है ! आपको बता दें कि राष्ट्रपति भवनके इतिहासमें यह दूसरा अवसर है, जब यहां ‘इफ्तार’ भोजका आयोजन नहीं होगा । इससे पहले,  पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलामने भी अपने कार्यकालके समय ‘इफ्तार’ भोजपर रोक लगा दी थी ।
राष्ट्रपति भवनके ‘प्रेस’ सचिव अशोक मलिकने संचार माध्यमको (मीडिया) कहा, ‘’२५ जुलाई २०१७ से राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्दके पदभार सम्भालनेके बाद उन्होंने यह निर्णय लिया कि राष्ट्रपति भवन सार्वजनिक भवन है, यहां करदाताओंके पैसोंपर किसी भी प्रकारके धार्मिक कार्यक्रमों या उत्सवोंका आयोजन नहीं किया जाएगा ! ‘

वर्ष २००२ से २००७ के मध्य राष्ट्रपति भवनमें ‘इफ्तार’ भोज नहीं हुआ था । ज्ञात है कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम, ‘इफ्तार’ भोजपर होने वाले व्ययको निर्धन और अनाथ बच्चोंकी शिक्षाके लिए दान कर देते थे ।  ज्ञात हो कि राष्ट्रपति भवनमें २५ दिसम्बरको क्रिसमसके समय ‘कैरल सिंगिंग’ और रमजानके समय ‘इफ्तार’का आयोजन पहले से चला आ रहा है; जबकि किसी अन्य धर्म /समुदायके त्यौहारोंसे सम्बन्धित दूसरे कार्यक्रम राष्ट्रपति भवनमें पहले ही नहीं होते हैं । ऐसे में अब ‘कम से कम’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्दके कार्यकालके मध्य ये दोनों कार्यक्रम नहीं होंगे, यह तय माना जा रहा है । राष्ट्रपति भवनसे आए वक्तव्यके अनुसार राष्ट्रपति भवनमें अब किसी भी त्यौहारपर प्रीतिभोज नहीं होगा ।

विशेषज्ञोंकी मानें तो राष्ट्रपति कोविन्दद्वारा ‘इफ्तार’ भोजकी परम्पराको समाप्त करनेके लिए महत्वपूर्ण पग है । आपको बता दें कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्रमोदीने वर्ष २०१५ में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जीकी ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी में शिरकत नहीं की थी. जिस समय ‘इफ्तार’ भोजका आयोजन हुआ, उस समय मोदीकी पूर्वोत्तर राज्योंके मुख्यमन्त्रियोंके साथ बैठक थी । मोदी अपने व्‍यस्‍त कार्यक्रमके कारण इसमें नहीं जा सके थे । इससे पहले वर्ष २०१४ में भी मोदीने राष्ट्रपतिकी ओर से दिए गए ‘इफ्तार’ भोजमें भाग नहीं लिया था ।

स्रोत : जी न्यूज



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution