पूर्वकालमें स्त्रियों और पुरुषोंके मुखपर दिव्य तेज रहता था, आज उस तेजको लाने हेतु सभी रासायनिक सौन्दर्य प्रसाधनोंका उपयोग करते हैं या सौन्दर्यवर्धनालयमें जाते हैं । स्त्रियोंमें स्त्री सुलभ लज्जा, पाक-कला और गृह-सज्जामें निपुणता, निरपेक्ष वात्सल्य, चरित्रका संरक्षण एवं साधना तथा धर्मपालन हेतु अखण्डतासे किए जानेवाले प्रयत्नोंके कारण स्त्रियोंमें नैसर्गिक सुन्दरता एवं तेज होता था । पुरुषोंद्वारा धर्मका आधार लेते हुए अर्थोपार्जन करना तथा अपनी कामनाओंकी पूर्ति करते हुए, धर्मपालन एवं साधना करते रहनेके कारण उनका मुख तेजसे दमकता था ।
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