ईश्वरका मारक तत्त्व इस ब्रह्माण्डमें कार्यरत हो चुका है; अतः सभी क्षेत्रोंके दुर्जन प्रवृत्तिके व्यक्तियोंने ‘शीघ्र अति शीघ्र’ अपनी चूकोंको स्वीकार कर कठोर प्रायश्चित्त स्वयं ही ले लेना चाहिए; अन्यथा ईश्वरकी जब लाठी बरसेगी, तब जग हंसाई तो होगी ही, साथ ही उनके कुलमें कोई उन्हें मृत्यु उपरान्त तिलाञ्जलि देनेवाला भी नहीं बचेगा ! सार्वजनिक धनको हडपनेवाले, समाजके साथ छल करनेवाले एवं अपने पदका अपने लिए लाभ उठानेवाले अत्यधिक सतर्क हो जाएं; क्योंकि समय आपके पास बहुत अल्प है, जब आपातकाल आ जाएगा, तब यह न कहें हमें किसीने सचेत नहीं किया था !
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