प्रेम और अनुशासनके मध्यका सामञ्जस्य सीखनेका उत्तम स्थल है आश्रम : आश्रम एक ऐसा स्थान होता है जहां प्रेम एवं अनुशासनका सुन्दर संगम होता है । इन दोनों गुणोंका अन्यत्र कहीं ऐसा संगम देखनेके लिए नहीं मिलता है । जैसे सेनाके निवास स्थानमें अनुशासन होता है; किन्तु प्रेम नहीं होता और घरमें प्रेम तो होता है; किन्तु अनुशासनका गम्भीरतापूर्वक पालन नहीं किया जाता है । अनेक व्यक्तियोंमें प्रेम तो होता है; किन्तु अनुशासनबद्धता नहीं होती, उसी प्रकार कुछ व्यक्तियोंमें अनुशासनबद्धता तो होती है; किन्तु प्रेम नहीं होता या उन्हें प्रेमको अभिव्यक्त करना नहीं आता है; अतः यदि इन दोनों गुणोंका समावेश कैसे करना है ?, यह सीखना है तो आश्रममें जाकर कुछ दिवस रहना चाहिए । आज अनेक घरोंमें इन दोनों गुणोंके नहीं होनेके कारण भी कलह-क्लेश निर्माण होता है ।
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