कुछ साधकोंको अनिष्ट शक्तियोंके कष्टके निवारणार्थ जो भी नामजप एवं आध्यात्मिक उपाय बताए जाते हैं, उसे वे नियमित नहीं करते हैं एवं अपने कष्टोंका रोना रोते रहते हैं । जैसे वैद्यको बारम्बार अपने कष्ट बतानेसे कष्ट दूर नहीं होता; अपितु उनकेद्वारा बताई गई औषधि लेना आवश्यक होता है, तभी व्यक्ति रोगमुक्त हो सकता है । उसी प्रकार आध्यात्मिक कष्टके निवारणार्थ सभी आध्यात्मिक उपचार करने आवश्यक होते हैं, उसके बिना कष्टका समाधान सम्भव नहीं ।
यदि आप सातत्यसे सेवा, स्वभावदोष निर्मूलन, नामजप इत्यादि सभी कर रहे हैं और आपपर कोई प्रभाव नहीं पड रहा है तो अवश्य ही आप अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शकसे अपनी अडचन बता सकते हैं । ऐसेमें वे अपनी आध्यात्मिक शक्तिका उपयोग कर आपके कष्ट निश्चित ही न्यून करेंगे; अतः उन्नत या सन्तकी सहायता हेतु अपने क्रियमाण कर्मका सौ प्रतिशत उपयोग करें !
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