धर्मद्रोहियोंका सातत्यसे, वैध मार्गसे विरोध करें !


धर्मद्रोहियोंका सातत्यसे, वैध मार्गसे विरोध करें !
धर्मकी निन्दा करनेवालोंका मुख वैध मार्गसे बन्द करना आवश्यक होता है । वैसा करना अर्थात उन्हें जडसे उखाडना । वैसा न करके, उनकेद्वारा की गई निन्दा अनुचित है, ऐसा सर्वत्र कहते फिरना अर्थात एक-एक पर्ण (पत्ता) तोडनेका प्रयास करना है । एक पर्ण तोडना अर्थात समाजके किसी एकके मनके विकल्पको दूर किया, तबतक धर्मद्रोही अन्य दस जनोंके मनमें विकल्प निर्माण करते हैं । वैसा न हो, इसीलिए धर्मद्रोहियोंका सातत्यसे वैध मार्गद्वारा विरोध करें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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