दूसरोंका विचार करते हुए कैसे रहना चाहिए ?, यह आश्रम जीवनसे सीखा जा सकता है : आश्रममें दूसरोंका विचार कैसे करना चाहिए ?, यह सिखाया जाता है और इससे अहम् न्यून होता है और व्यक्तिके मानवीय मूल्योंमें वृद्धि होती है, फलस्वरूप जब व्यक्ति यह गुण सीखकर उसे अपने जीवनमें आत्मसात करते हैं और इससे वह एक अच्छा व्यक्ति, उत्तरदायी नागरिक तो बनता ही है, सम्पूर्ण मानव जातिके कल्याण करनेकी भावना उसमें अन्तर्भूत होती है, इससे उसका मनुष्य जीवन सार्थक बनता है ।
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