सहस्त्रों कश्मीरी पण्डितोंने मन्दिरोंमें एकत्रित होकर घाटीमें शान्तिके लिए प्रार्थना की !


जून २१, २०१८

अपने प्राणोंकी चिन्ता न करते हुए सहस्त्रोंकी संख्यामें कश्मीरी पण्डित दक्षिण कश्मीर स्थित ‘खीर भवानी’ और ‘माता त्रिपुर सुन्दरी’के प्राचीन मन्दिरोंमें वैष्णव देवियोंका जन्मोत्सव मनानेके लिए एकत्र हुए । इन मन्दिरोंमें उन्होंने कश्मीरमें शान्ति और स्थिति सामान्य होनेके लिए प्रार्थना की ।

तुलमुलामें (गंदेरबल जिला) माता खीर भवानी, कुलगाम प्रान्तके देवसरमें देवी त्रिपुर सुन्दरी और मंजगाममें देवी रागनीय भगवती, अनन्तनागमें रागनीय भगवती लोक्तिपुर और कुपवाडाके टिक्करमें रागनीय माताका जन्मोत्सव कश्मीरी पण्डितोंने कल यज्ञ, सामुदायिक रसोई और प्रार्थना सभाएं कर मनाया ।
आतंकवादके चलते कश्मीरी पण्डितोंका विस्थापन आरम्भ होनेके बाद पिछले २९ वर्षोमें यह प्रथम अवसर है, जब सभी पांच प्राचीन मन्दिरोंमें कश्मीरी पण्डितोंने इतने बडे स्तरपर यज्ञ, सामुदायिक रसोई और प्रार्थना सभाएं की । दिलीप रैना नामके एक श्रद्धालुने बताया कि कश्मीर घाटीमें अशान्त परिस्थिति भी मंजगामके मन्दिरोंमें पूजा अर्चना करनेसे श्रद्धालुओंको नहीं डिगा सके । वहीं, विनय कौल नामके एक श्रद्धालुने बताया कि उन्हें कोई समस्या नहीं आई । उन्होंने कहा कि स्थानीय मुसलमानोंने इस अवसरपर आगे बढकर श्रद्धालुओंको बधाई दी ।
मंजगाम मन्दिरमें महायज्ञ करने वाले प्रमुख पुजारी अवतार शास्त्रीने कहा कि वर्षों बाद कश्मीरी पण्डितोंने इस उत्सवमें भाग लिया । प्रसिद्ध अहरबल जलप्रपातके पास स्थित मंजगामके मन्दिरमें २३०० कश्मीरी पण्डित पहुंचे, जबकि २५०० श्रद्धालु कुलगाममें देवसरके त्रिपुर मन्दिर पहुंचे ।
मंजगाम मन्दिर कश्मीरीके सुदूर दक्षिणी भागमें स्थित है । १९९० में आतंकवादियोंके एक बम विस्फोट करनेके बाद यह मन्दिर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इसका पुनर्निर्माण कराया गया । कुपवाडाके टिक्करमें १५०० से अधिक श्रद्धालु यज्ञमें सम्मिलित हुए और कश्मीरमें शान्ति और परिस्थिति सामान्य होनेकी प्रार्थना की । ज्ञात है कि इस वर्ष कश्मीर घाटीमें अलग-अगल भिडन्तके समय ५३ से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं और दो दर्जन नागरिक और सुरक्षाकर्मियोंके प्राण गए हैं ।

स्रोत : अमर उजाला



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