पाठ्यक्रममें विस्सतारसे सम्मिलित होगा ‘आपातकाल’का काला अध्याय !


जून २५, २०१८

केन्द्र शासन अब विद्यालयोंमें पढाई जाने वाली पुस्तकोंमें ‘आपातकाल’के काले युगको विस्तारसे जोडने जा रही है । इसकी घोषणा मानव संसाधन और विकास मन्त्री प्रकाश जावडेकरने की । समाचार विभाग ‘एएनआई’के अनुसार प्रकाश जावडेकरने कहा, ”हमारी पुस्तकोंमें ‘आपातकाल’पर अध्याय और सन्दर्भ हैं; लेकिन हम पाठ्यक्रममें यह भी सम्मिलित करेंगे कि किस प्रकार आपातकालके काले चरणने लोकतन्त्रको प्रभावित किया, ताकि आने वाली पीढियां इस बारेमें जान सकें । जावडेकरकी बातको कांग्रेसपर लक्ष्य साधना माना जा रहा है । इससे पूर्व  सोमवारको (जून २५) ही केन्द्रीय मन्त्री अरुण जेटलीने पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधीकी तुलना क्रूरतम तानाशाहोंमेंसे एक ‘हिटलर’से कर दी ! जेटलीने कहा दोनोंने लोकतन्त्रको तानाशाहीमें बदलनेके लिए संविधानका प्रयोग किया था । बता दें कि इन्दिरा गान्धीने देशमें आपातकाल लगाया था । आपातकालके ४३ वर्ष होनेपर जेटलीने कहा कि जर्मन तानाशाहकी तरह गान्धी भी भारतको एक वंशवादी लोकतन्त्रमें बदलनेके लिए आगे बढी थीं ।

जेटलीने आगे कहा, “हिटलर और गान्धी दोनोंने कभी भी संविधानको रद्द नहीं किया, उन्होंने लोकतन्त्रको तानाशाहीमें बदलनेके लिए एक गणतन्त्रके संविधानका दुरूपयोग किया !” बीजेपी नेताने कहा कि गान्धीने अनुच्छेद ३५२ के अन्तर्गत ‘आपातकाल’ लागू किया, अनुच्छेद ३५९ के अन्तर्गत मौलिक अधिकारोंको भंग कर दिया और यह प्रस्तुत किया कि विपक्षने अव्यवस्था पैदा करनेकी योजना बनाई थी । उन्होंने कहा कि हिटलरने अधिकांश सांसदोंको बन्दी बना लिया था । जेटलीने कहा, “इन्दिराने विपक्षी सांसदोंको बन्दी बनवा लिया था और उनकी अनुपस्थितिमें दो-तिहाई बहुमत सिद्धकर संविधानमें काफि संशोधन करवा लिए ।” भाजपा नेताने कहा कि ‘४२वें संशोधन’के माध्यमसे उच्च न्यायालयोंके समादेश याचिका देनेेके अधिकारको नष्ट कर दिया गया । डॉ. भीमराव अम्बेडकरने इस शक्तिको संविधानकी आत्मा बताया था ।

उन्होंने कहा, “इसके अतिरिक्त इन्दिर ने ‘अनुच्छेद ३६८’ में भी बदलाव किया था, ताकि संविधानमें किए गए बदलावकी न्यायिक समीक्षा न की जा सके ! ऐसी बहुत-सी चीजें थीं, जिसे हिटलरने नहीं किया; लेकिन गान्धीने की ।” जेटलीने कहा, “उन्होंने संसदीय कार्यवाहीके समाचार माध्यमोंमें प्रकाशनपर भी प्रतिबन्ध लगा दिया । जिस विधानने समाचार माध्यमोंको संसदीय कार्यवाहीको प्रकाशित करनेका अधिकार दिया, उसे ‘फिरोज गांधी विधेयक’के नामसे जाना जाता था ।”

बता दें कि इन्दिरा गान्धीका लगाया आपातकाल २१ मार्च १९७७ तक जारी रहा था । यह तीसरी बार देशमें लागू हुआ था । प्रथम १९६२ में भारत-चीन युद्धके समय, द्वितीय १९७१ में भारत-पाक युद्धके समय और १९७५ में अन्तिम बार आन्तरिक उथल-पुथलके सन्दर्भमें आपातकाल लगाया गया था !

स्रोत : जनसत्ता



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