जून २९, २०१८
कृत्रिम औषधीय अपराधी संगठन (माफिया) पंजाबमें बडा षडयन्त्र कर रहा है । पंजाबमें गत दिवसोंमें मादक पदार्थोंके अधिक मात्राके कारण जो मृत्यु हुई हैं, उनमें अधिकांश कृत्रिम औषधियोंके (मादक पदार्थों) कारण हुई हैं । वहीं यह विपणिमें (बाजार) सरलतासे उपलब्ध हो रहा है और ‘हैरोइन’, चरस और अफीमकी तुलनामें इसका विक्रयभी अधिक है । हैरोइन और अफीम तो पंजाबमें सीमा पारसे आ रही हैं; लेकिन देशके भीतरसे ही बनकर कृत्रिम औषधि प्रदेशमें जा रही है, जो कि पंजाबकी युवा पीढीको नष्ट कर रहा है । सूत्रोंका कहना है कि शासकीय तन्त्रमें सक्रिय कुछ लोग इनके साथ मिले हुए हैं, जिसके चलते जालन्धर और लुधियाना कृत्रिम औषधियोंके केन्द्र बन गए हैं ।
रेलवे कृत्रिम औषधियों की (मादक पदार्थ) आपूर्तिका माध्यम बना हुआ है । इस व्यापारसे सम्बन्धित लोग रेलयानमें बिना बिल और बिना विपत्रके सामानके साथ कृत्रिम औषधियों (मादक पदार्थ) भी इधर-उधर कर रहे हैं । अवैधानिक ढंगमें बिना बिल और विपत्रके इधर-उधर हो रही सामग्रीपर कुछ परिवाहक सहस्त्रों रुपये अर्जितकर रहे हैं । परिवाहकके समय ऐसी सामग्रीकी पैकिंगपर एक विशेष चिह्न लगा दिया जाता है, जैसे ‘जेम्स बाण्ड और सुपरमैन’ । ऐसा चिह्न लगनेपर जब यह सामग्री यहां पहुंचती है तो सम्बन्धित व्यक्तिको उसकी सूचना पहुंच जाती है और बडी ही चतुराईसे रेलवे स्टेशनसे सामग्री पहुंच जाती है ।
स्वास्थ्य विभाग और कर विभागके कर्मी मिले हैं अपराधी संगठनके साथ
ये कृत्रिम औषधियों (मादक पदार्थ) बिना बिलके पंजाबमें आती हैं, इस तरहसे इससे शासनको कोटि रूपयोंके करकी हानि होती है । सूत्रोंका कहना है कि यह समस्त कार्य स्वास्थ्य और करविभागमें कुछ भ्रष्ट कर्मियोंके माध्यमसे बहुत सरलतासे हो रहा है । सूत्रोंका कहना है कि कई प्रकरण तो ऐसे हैं जिनमें कोई औषधि विक्रेता पकडा भी गया तो उसका अनुज्ञापत्र (लाइसैंस) रद्द हो गया और मिले होनेके कारण उसके कुटुम्बके किसी अन्य सदस्यको अनुज्ञापत्र दे दिया, ताकि उसका कार्य चलता रहे।
सूत्रोंका कहना है कि जालन्धरमें ऐसे ४ बडे गुट कार्यरत हैं । सर्वाधिक लुधियानामें यह कार्य चल रहा है । जालन्धरमें एक ऐसी ‘काली भेड’की चर्चा काफी रही है, महानुभाव एक बडे नेताका विशिष्ट है ! इसने गत कुछ समयमें कोटि रुपयोंकी सम्पत्ति बनाई है । सूत्रोंके अनुसार गत शासनमें एक अधिकारीने इसको और इसके एक सहकर्मीको पकडनेका कई बार प्रयास भी किया । ये लोग एक बडे नेताके वाहनमें राजस्थान, दिल्ली और उत्तरप्रदेशसे कृत्रिम औषधियां (मादक पदार्थ) लेकर यहां आते रहते थे !
जालन्धर, लुधियाना, अमृतसर और पठानकोटमें कृत्रिम औषधियोंके (मादक पदार्थ) अपराधी सक्रिय हैं ! यह सामग्री सांकेतिक भाषामें विक्रय होती है ! इस व्यापारसे सम्बन्धित लोगोंने अपने भण्डार नगर से बाहर बनाए हुए हैं । यह सामग्री केवल पक्के विक्रेताओंको ही दी जाती है, जो इनके पुराने सम्बन्धी हैं । इनसे भी ये सांकेतिक भाषामें वार्ता करते हैं । सामग्री देर रातको दी जाती है । नूतन विक्रेताओंको ये सामग्री नहीं देते हैं । इनका लक्ष्य आसपासके गांव और उपनगर होते हैं । जालन्धरसे दोआबा और माझातक यह सामग्री जाती है, इसी तरहसे लुधियानासे मालवामें जाता है ।
पंजाबमें अपनी मूल शक्तिशाली करनेके पश्चात कृत्रिम औषधियां (मादक पदार्थ) निकटवर्ती राज्य हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली जैसे नगरोंसे आ रही है ! पंजाब गत कुछ समयसे इसकी विशाल मण्डीके रूपमें विकसित हो गया है ।
स्रोत : पंजाब केसरी
Leave a Reply