आश्रममें आकर रहनेका महत्त्व (भाग – ५)


ईश्वरीय चैतन्यका स्रोत है आश्रम : आश्रम ईश्वरीय चैतन्यका स्रोत होता है; क्योंकि वहां सन्त, गुरु, देवी-देवताओंका स्थूल वास तो होता ही है, सन्त परम्परामें जितने भी गुरु हुए हैं, उन सबका सूक्ष्म अस्तित्त्व एवं आशीर्वाद भी होता है । इसका परिणाम वहां जाकर कुछ दिवस सेवा करनेसे प्राप्त होने लगता है ।



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