आजके बहुसंख्यक हिन्दुओंसा मूढ जगमें कोई न होगा ! किसी औषधिका रोगपर प्रभाव न पडनेपर, वैद्य औषधि परिवर्तित कर भिन्न औषधि देते हैं । किसी वैद्यके उपचारसे लाभ न होनेपर रोगी दूसरे वैद्यके पास जाते हैं । मात्र राजकीय पक्षोंके कारण पिछले ६८ वर्षोंमें भारत तथा हिन्दू रसातलको गए हैं, तथापि हिन्दू लोकतन्त्रके स्थानपर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना नहीं कर रहे हैं !
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