श्रीगुरू उवाच


हिन्दुत्ववादियो ! मैं अकेला क्या करूंगा ? ऐसा विचार न करें !
कुछ हिन्दुत्ववादी सोचते हैं कि हम अकेले कैसे लडें ? ऐसे व्यक्ति यह जान लें कि क्रान्तिकारियोंने ऐसा कभी विचार नहीं किया । वे एकाकी ही लडे । उन्होंने अन्यायका तत्काल प्रतिकार किया; इसीलिए वे अजर-अमर हो गए तथा अंग्रेज शासनको उनसे भय लगने लगा ।



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