आश्रमका दिव्य प्रसाद ग्रहण करना है बडे सौभाग्यकी बात : आश्रमका ‘महाप्रसाद’ चैतन्यसे आवेशित होता है और किसी भी लोकमें नहीं प्राप्य नहीं होता है । तभी तो देव, ऋषि, यक्ष, किन्नर, गन्धर्व सब वेश परिवर्तितकर आश्रमका ‘महाप्रसाद’ ग्रहण करने आते हैं; इस दैवी प्रसादको ग्रहण करनेसे स्थूल देह एवं मनोदेहकी शुद्धि होती है और यह मात्र भाग्यशाली व्यक्तियोंको ही प्राप्य हो पाता है ।
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