जुलाई ७, २०१८
देशका ‘ग्रामीण विकास मन्त्रालय’ जहां केन्द्र शासनकी ग्रामीण भारतकी जनहित योजनाओंको गांव-गांवतक पहुंचानेमें जुटा हुआ है, वहीं ग्राम विकाससे जुडे होनेके पश्चात भी मन्त्रालयके अधिकारी हिन्दीसे दूर हैं ! यहां तक कि अधिकारिक कार्यमें १०० प्रतिशत हिन्दीके प्रयोगका लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है । वहीं मन्त्रालयने अब हिन्दी नहीं जानने वाले अधिकारियोंको हिन्दीका प्रशिक्षण देनेकी योजना बनाई है ।
ग्रामीण विकास मन्त्रालय अपने अधिकारियोंको हिन्दी सिखानेमें संलग्न है । मन्त्रालयके सूत्रोंके अनुसार १५ जूनको मन्त्रालयकी ‘आधिकारिक भाषा कार्यान्वयन समिति’की एक बैठक हुई थी, जिसमें बताया गया था कि मन्त्रालयके सभी कार्य हिन्दीमें होने चाहिए । सूत्रोंने बताया कि मन्त्रालयके कई विभागोंमें हिन्दीमें पत्राचार, नोट लेने अथवा टिप्पणियोंका प्रतिशत अत्यल्प है !
सूत्रोंने बताया कि बैठकके अनुसार आधिकारिक कार्यमें हिन्दीके प्रयोगको बढानेको लेकर मन्त्रालय त्रैमासिक विवरण तैयार करेगा ! अन्तिम त्रैमासिक विवरण अनुसार बजट, सूचना शिक्षा और संचार, ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम’, नीति एवं योजना सहित १० विभाग हिन्दीमें १०० प्रतिशत पत्राचारके निर्धारित लक्ष्यसे काफी पीछे रहे हैं और ये १० विभाग हिन्दीमें अपने नोट्स और टिप्पणियां लिखनेको लेकर ७५ प्रतिशत लक्ष्य भी प्राप्त नहीं कर पााए ।
यह भी कहा गया है कि मन्त्रालयके जालस्थलको पूर्ण रूपसे द्विभाषी बनानेके लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं ! साथ ही, हिन्दीमें पत्राचारको बढानेके लिए मन्त्रालयने बैठकमें परामर्श दिया कि हिन्दीमें एक ‘कवर लेटर’के साथ लिखितपत्र भेजे जाएंगे और लक्ष्यसे पीछे रहने वाले विभागोंके अधिकारियोंको लक्ष्य प्राप्ति करनेके लिए सभी सम्भव प्रयास अपनानेको कहा जाए ! वहीं मन्त्रालयमें रिक्त हिन्दी पदोंको ‘आउटसोर्स’ करनेका भी निर्णय लिया गया ।
हिन्दी जानने वाले २० आशुलिपिकको (स्टेनोग्राफर्स) अधिकारियोंके साथ लगाया जाएगा ।
इसके अतिरिक्त मन्त्रालयमें हिन्दी जानने वाले २० आशुलिपिकको उन अधिकारियोंके साथ लगाया जाए, जो हिन्दीका प्रयोग करना चाहते हैं । सूत्रोंने बताया कि मन्त्रालयके सभी आधिकारिक संचार और पत्राचार हिन्दीमें होने चाहिए; लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है । मन्त्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूरा कार्य हिन्दीमें हो ।
‘ग्रामीण विकास मन्त्रालय’पर केन्द्र शासनकी कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं, जिसमें मनरेगा, प्रधानमन्त्री आवास योजना, प्रधानमन्त्री ग्राम सडडक योजना, ग्राम स्वराज अभियान और ग्रामीण आजीविका जैसी कई योजनाओंका उत्तरदायित्व है, जो सीधे देशके ग्रामीण क्षेत्रोंसे जुडी हुई हैं ।
सूत्रोंका कहना है कि हिन्दीके प्रयोगको लेकर मन्त्रालयमें इतना दबाव है कि हिन्दी नहीं जानने वाले अधिकारियोंको हिन्दी सीखनेके लिए प्रशिक्षणकी व्यवस्था करनेके लिए बोल दिया गया है ! साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियोंके लिए पुस्तकालयोंसे हिन्दी पुस्तकोंके क्रय करनेके लिए भी बोला जा चुका है ।
स्रोत : अमर उजाला
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