जुलाई १२, २०१८
‘काउण्टर इण्टेलिजेंस’ अभियानके अन्तर्गत भारतीय सुरक्षा विभागोंने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेटकी (आईएस) दिल्लीमें विस्फोट करनेकी इच्छा असफल कर दी है । विभागकी माने तो ‘आईएस’के अफगानिस्तान इकाईमें सक्रिय आत्मघाती आतंकियोंने दिल्लीमें विस्फोटका षडयन्त्र बनाया था ! इसको आतंकियोंने ‘इण्डियन प्लाण्ट’ नाम दिया था ।
जांचमें भारतीय गुप्तचर विभाग ‘रॉ’ और स्पेशल सेलके दल सहित अन्य केन्द्रीय विभागोंको भी जोडा गया था । यह जांच तब आरम्भ की गई, जब केन्द्रीय गुप्तचर विभागोंने ‘आईएस’द्वारा अपने आत्मघाती आक्रान्ताओंको भारत भेजने और देशकी राजधानीमें उसके रहनेकी व्यवस्था करनेमें सफलता प्राप्त की थी । गत वर्ष २०१७ में सितम्बर माहमें भारतीय विभागोंने सन्दिग्धको पकडा था ।
आईएसका यह सन्दिग्ध दिल्लीमें अभियान्त्रिकीके छात्रके रूपमें रह रहा था । उसे अफगानिस्तान भेज दिया गया और माना जाता है कि इस समय वो अफगानिस्तानमें एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य बेसमें बन्दी है । इस अफगान आक्रान्ताके बारेमें यह कहा जाता है कि यह इतना प्रभावशाली था कि उससे पूछताछसे मिली सूचनाके आधारपर अमेरिकी बलोंको अफगानिस्तानमें तालिबानके विरुद्ध महत्वपूर्ण सफलता मिली है !
सुरक्षा विभागकी मानें तो अफगानिस्तान, दुबई और नई दिल्लीमें लगभग १८ माहकी निगरानीके पश्चात गुप्तचर विभागोंको यह सूचना मिली कि १२ आईएस आतंकियोंके एक दलको पाकिस्तानमें प्रशिक्षणके पश्चात विस्फोटके लिए भेजा गया है । इनकी आयु २० वर्षके निकट है और ये सभी अफगानिस्तानके नागरिक हैं ।
जांच विभागके अनुसार गुप्त अभियानके अन्तर्गत उसने किसी निजी महाविद्यालयमें प्रवेश लिया था । आरम्भमें वो महाविद्यालयके छात्रावासमें रहा; लेकिन बाद में वह लाजपत नगरमें आकर रूका था; यद्यपि निरन्तर उसपर देखरेख करने वाले विभागने लगभग एक माहतक लगभग ८० लोगोंके दलके साथ की गई जांचके बाद अंतत: पकड लिया ।
‘आईएस’से सम्बन्धित इस सन्दिग्धने दिल्ली विमानतल (एयरपोर्ट), ‘मॉल्स’, विपणिको देखकर कई स्थानोंको सम्भावित आतंकी विस्फोटके लिए चुना था ! विभागके अनुसार इनकेद्वारा भिन्न-भिन्न देशोंमें १२ स्थानोंपर विस्फोट किए जाने थे । उससे पूछताछके समय पता चला कि २२ मई २०१७ को मैनचेस्टर आक्रमणको इसके दलके लोगोंने ही कार्यरूप दिया था, जिसमें २३ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी ।
भारतके गुप्तचर विभाग ‘रॉ’ने आतंकीके संज्ञानके पश्चात भारतमें उसके घुसते ही दृष्टि रखना आरम्भ कर दिया था । महीनोंकी योजनाके पश्चात विभागने अपने एक गुप्तचरको आतंकीसे मित्रता करनेके लिए भेजा था । इतना ही नहीं भारतीय गुप्तचरको आखिरी दिनोंमें ‘आईएस’की ओरसे विस्फोटक बनानेकी सामग्री उपलब्ध करानेका उत्तरदायित्व दिया गया था । भारतीय गुप्तचरने उसे विस्फोटक उपलब्ध भी कराए थे; लेकिन उनमें ट्रिगर नहीं था । बताया गया है कि आतंकीने अन्तिम दिनोंमें विस्फोटके स्थानके अन्वेषणके लिए दिल्ली विमानतल (एयरपोर्ट), अंसल प्लाजा मॉल, वसन्त कुञ्ज मॉल और साउथ एक्सटेंशनका भ्रमण किया था । साथ ही इस बारेमें अफगानिस्तानमें बैठे अपने स्वामियोंको भी सूचना दी थी ।
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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