जुलाई १४, २०१८
मदर टेरेसाकी ‘मिशनरी ऑफ चैरिटीज’की बन्दी ‘सिस्टर’ कंसोलियाने स्वीकार किया है कि उसने बालाश्रयसे तीन बच्चोंको पैसे लेकर विक्रय किया तथा एक बच्चेको बिना पैसे लिए ही किसी को दे दिया ! रांचीके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ताने बताया कि इस प्रकरणमें बन्दी बनाई ‘सिस्टर’ कंसोलियाने पुलिसके समक्ष अपना अपराध स्वीकार किया है और स्पष्ट कहा है कि उसने पैसे लेकर तीन बच्चोंको विक्रय किया था ! उसने बताया कि एक बच्चेको उसने बिना पैसे लिये ही किसीको दिया था ! पुलिस चौथे बच्चेका संज्ञानमें लगी है, जिसका अबतक संज्ञान नहीं हुआ है । इस मध्य पुलिसकी पूछताछका एक ‘वीडियो’ भी प्रसार माध्यमके समक्ष सामाजिक प्रसार माध्यमसे आया है, जिसमें ‘सिस्टर’ अपना दोष स्वीकार कर रही है, जबकि इसके विपरीत ‘मिशनरी’के ‘बिशप’ इस प्रकरणमें ‘सिस्टर’का हाथ होनेसे मना कर रहे थे। इस वीडियोको समाचार विभाग ‘एएनआई’ने भी दिखाया है ।
इससे पूर्व रांचीके नगर पुलिस अधीक्षक अमन कुमारने बताया कि ‘मिशनरी’से विक्रय किए गये चौथे बच्चेका अबतक संज्ञान नहीं हुआ है और संज्ञान करने व इसमें सम्मिलित गिरोहका प्रकटीकरण करनेके लिए पुलिसने ‘सिस्टर’ कंसोलिया और इन्दवारको १३ जुलाईको पूछताछ की, जिसका आवेदन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयम्भूकी न्यायालयमें दिया गया था जो उन्होंने स्वीकार कर लिया । कुमारने बताया कि दोनोंको पुलिसने वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण कर कल शाम पूछताछ की ।
इससे पूर्व गुरुवारको ‘इण्डियन बिशप्स कांफ्रेंस’के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहासने यहां कहा था कि मदर टेरेसाकी ‘मिशनरीज आफ चैरिटी’ बच्चोंके क्रय-विक्रयसे सम्बन्धित प्रकरणमें सम्मिलित नहीं है और यदि कोई एक ‘सिस्टर’ इस प्रकरणमें दोषी भी है तो उसकी चूकके लिए पूरी ‘मिशनरी’को दोषी नहीं बताना चाहिए । ‘बिशप’ मैस्करेनहासने यहां संवाददाता सम्मेलनमें कहा था, ‘‘’मिशनरीज आफ चैरिटीज’ बच्चोंके विक्रयमें बिल्कुल भी सम्मिलित नहीं है । वैसे तो इस प्रकरणमें ‘सिस्टर’ कंसीलियाने भी अपने अधिवक्ताको बताया था कि वह बच्चोंके विक्रयमें कहीं से भी सम्मिलित नहीं है । उससे पुलिसने दबाव में यह वक्तव्य लिया है कि उसने बच्चोंको विक्रय किया था !’’
रांचीके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ताने पहले ही कहा था, ‘‘ ‘इण्डियन बिशप्स कांफ्रेंस’के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहासद्वारा दिया गया कथन पूरी तरहसे गलत और निराधार है । पुलिसने बच्चोंके विक्रयके प्रकरणमें ‘मिशनरी आफ चैरिटीज’की ‘सिस्टर’ कंसीलियाको बन्दी बनानेके पश्चात उसके कथन और उससे मिली सूचनाओंके आधारपर ही चार बच्चोंमें से तीनको विभिन्न स्थानोंसे प्राप्त किया है और बचाया है । ऐसे में यह बात कैसे सही हो सकती है कि ‘सिस्टर’से पुलिसने दबावमें वक्तव्य लिया गया है ?’’
स्रोत : जनसत्ता
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