‘एएमयू’में आरक्षण नहीं तो एचआरडी मन्त्रालय किस आधारपर दे रहा है अनुदान ? – सर्वोच्च न्यायालय आयोग


जुलाई १५, २०१८

अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयमें आरक्षण विवादके मध्य एससी आयोगने ‘एचआरडी’ मन्त्रालयसे अनुदानको लेकर सूचना मांगी है । आयोगने मानव संसाधन विकास मन्त्रालयसेे पूछा कि किस आधारपर एएमयूको अनुदान दिया जा रहा है । यदि, विश्वविद्यालयमें आरक्षणकी व्यवस्था नहीं है तो अनुदान क्यों मिल रहा है ? आयोगने यह भी पूछा कि अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयमें SC-ST-OBC छात्रोंको आरक्षण क्यों नहीं मिल रहा है ?
एससी आयोगने एचआरडी मन्त्रालयसे कहा कि यदि एएमयूमें आरक्षणकी व्यवस्था नहीं है तो अबतक मन्त्रालयकी ओरसे आरक्षण लगानेके लिए क्या-क्या पग उठाए गए हैं । एससी आयोगने मानव संसाधन विकास मन्त्रालयको २० जुलाईतक का समय दिया है ।
गत दिवसोंमें SC-ST-OBC छात्रोंको आरक्षण नहीं मिलनेको लेकर उत्तर प्रदेश एससी/एसटी आयोगके अध्यक्ष बृजलालने विश्वविद्यालय प्रशासनको सूचना भेजी थी । आयोगने पूछा था कि एएमयूमें एससी और एसटीको आरक्षण क्यों नहीं मिल रहा है ? इसमें कहा गया था कि एएमयूको अभीतक अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयका स्थान नहीं मिला है । यह एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है, जिसके कारण यहां भी आरक्षणका प्रावधान लागू होता है; इसलिए, एएमयूमें भी एससी और एसटीको आरक्षण मिलना चाहिए । बृजलालने कहा है कि एएमयू अपने संवैधानिक दायित्वोंका निर्वहन नहीं कर रहा है । न्यायालयके पत्रका उत्तर देनेके लिए एएमयू प्रशासनको ८ अगस्तका समय दिया गया है ।

एससी आयोगके अधिकारी रामशंकर कठेरियाने जी न्यूजसे वार्तामें कहा कि अगस्तके अन्तिम सप्ताहमें आयोग एएमयूमें आरक्षणको लेकर निर्णय देगा । अभी सभी स्टेक होल्डरसे उत्तर मांगे गए हैं । एचआरडी मन्त्रालयसे पूछा गया है कि एएमयूको ग्राण्ट देनेका कारण बताएं ? अल्पसंख्यक आयोगका उत्तर आ गया है । ३ अगस्ततक एएमयूका भी उत्तर आ जाएगा और तब हम निर्णय लेंगे !

गत दिवस राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोगके अध्यक्ष प्रोफेसर राम शंकर कठेरियाने एएमयूमें आरक्षणका प्रकरण उठाया था । इसी प्रकरणमें बात करनेके लिए वो एएमयू पहुंचे थे । समाचार माध्यमोंसे वार्ता करते हुए रामशंकर कठेरियाने कहा था कि जेएनयू और जामिया विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं, इसके बाद भी इन दोनोंमें छात्रोंको आरक्षणका लाभ न दिए जानेसे छात्रोंमें आक्रोश है । उन्होंने कहा था कि पूरे प्रकरणपर शासन और आयोगने उच्चतम न्यायालयमें अपना पक्ष रखा है ।

स्रोत : जी न्यूज



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