बुद्धिप्रामाण्यवादियोंको विज्ञानका भले ही अहंकार हो, उन्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि उन्हें सूक्ष्मसे सूक्ष्म एक कोशिकीय प्राणी तो जाने दें, अपितु बाह्य वस्तुओंके उपयोगके बिना पाषाणका एक कण भी बनाना असम्भव है । इसके विपरीत ईश्वरने अनेक कोशिकायुक्त मानव तथा अनन्त कोटि ब्रम्हाण्डोंका निर्माण किया है । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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