भारतका इस्लामीकरण आरम्भ, सरकारी विद्यालय बना ‘मदरसा’, रविवारके स्थानपर शुक्रवारको होती है छुट्टी
देवरियाके सलेमपुर क्षेत्रमें एक परिषदीय विद्यालयके एक मुसलमान प्रधानाध्यापकने नियमकी धज्जियां उडाते हुए शुक्रवारको विद्यालय बन्द रखनेकी परम्परा आरम्भ कर दी है ! यह विद्यालय रविवारको खुलता है । इस शुक्रवारको इस तथ्यका रहस्योद्घाटन होनेपर बेसिक शिक्षा विभागमें हडकम्प मच गया । जिलाधिकारी सुजीत कुमारने बेसिक शिक्षा अधिकारीसे जांच पत्रावली मांगते हुए कार्यवाहीके निर्देश दिए हैं ।
जांचमें हुआ उजागर
सलेमपुरके खण्ड शिक्षा अधिकारी ज्ञानचन्द मिश्रको गुरुवारको जानकारी मिली कि प्राथमिक विद्यालय नवलपुरमें नियुक्त प्रधानाध्यापक शुक्रवारको विद्यालय बन्द रखते हैं । इसकी जांचके लिए खण्ड शिक्षा अधिकारीने शुक्रवारको शिक्षा विभागके अधिकारी देवी शरण सिंह और हरेन्द्र द्विवेदीको विद्यालय भेजा, दोनों लोग प्रातः ९.४५ बजे विद्यालय पहुंचे तो वह बन्द मिला ! यही नहीं विद्यालयके भवनपर प्राथमिक विद्यालय नवलपुरके स्थानपर ‘इस्लामिया प्राइमरी स्कूल नवलपुर’ लिखा हुआ पाया गया ! इसपर उन्होंने विद्यालयके प्रधानाध्यापक खुर्शेद अहमदको सभी पत्रावलियोंके साथ कार्यालय बुलाया । पत्रावलियोंकी जांचमें पाया गया कि बहुत समयसे उक्त विद्यालय शुक्रवारको बन्द रहता है और इसके स्थानमें रविवारको खोला जाता है, उपस्थिति पुस्तिकाकी जांचमें भी इसकी पुष्टि हुई ।
हिन्दुओ ! यह है मुसलामानोंकी प्रवृत्ति, मस्जिदके लिए स्थान दो तो आसपासका क्षेत्र उनका हो जाता है, वहां नमाज पढकर अधिकार जमाते हैं, विद्यालय दे दो तो मदरसा बना देते हैं ! यह देश देकर देखें, त्वरित सीरिया और अफगानिस्तान बना देंगे ! विश्वास नहीं है तो कश्मीर और बंगालका उदहारण आपके समक्ष है !
यह शासकीय विद्यालयकी स्थिति ऐसे अनाथों जैसे क्यों थी ?, इसके ऊपरके अधिकारी विद्यालयमें नियमित निरिक्षण हेतु क्यों नहीं जाते थे ? उनपर भी कठोर कार्यवाही होनी चाहिए और उस प्रधानाध्यापकको मदरसामें पढाने हेतु शासकीय चाकरीसे मुक्त करना चाहिए ! – तनुजा ठाकुर (२३.७.२०१८)
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