अयोध्याकी विवादित भूमिपर हिन्दू-मुस्लिमोंके पश्चात बौद्धोंका दावा


जुलाई २३, २०१८

अयोध्याके ‘राम जन्मभूमि-बाबरी-मस्जिद’ विवादमें हिश्दू-मुस्लिमोंके अधिकार बतानेके पश्चात अब बौद्ध समुदायने भी अपना अधिकार प्रस्तुत किया है । उच्चतम न्यायालयमें बौद्ध समुदायके कुछ लोगोंने याचिका देकर कहा है कि यह विवादित भूमि बौद्धोंकी है । यहांपर पहले एक बौद्ध स्थल था; यद्यपि उच्चतम न्यायालयने बौद्ध धर्मके लोगोंकी याचिकापर सुनवाई करनेसे मना कर दिया है । न्यायालयने कहा कि मुख्य अभियोगकी सुनवाई वाली पीठ ही सुनवाई कर सकती है । अयोध्यामें रहने वाले विनीत कुमार मौर्यने उच्चतम न्यायालयमें इस बारेमें याचिका दी है । उन्होंने विवादित स्थलपर भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभागद्वारा (ASI) चार बार की जाने वाली खुदाईके आधारपर यह दावा किया है । बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालयकी लखनऊ पीठके (बेंच) आदेशपर अयोध्यामें अन्तिम खुदाई वर्ष २००२-०३ में हुई थी । उच्चतम न्यायालयमें यह याचिका गत सप्ताह ही दी गई है । इसे संविधानके अनुच्छेद ३२ के (अनुच्छेद २५, २६ और २९ के साथ) अन्तर्गत एक आर्थिक प्रकरणके (दीवानी मामले) रूपमें प्रविष्ट किया गया है ।

कहा गया है कि यह याचिका बौद्ध समुदायके उन सदस्योंकी ओरसे दी गई है, जो भगवान बुद्धके सिद्धान्तोंके आधारपर अपना जीवन जी रहे हैं । याचिकामें कहा गया है कि बाबरी मस्जिदके निर्माणसे पूर्व उस स्थानपर बौद्ध धर्मसे सम्बन्धित ढांचा था । मौर्यने अपनी याचिकामें कहा है, ‘एएसआईकी खुदाईसे पता चला है कि वहां स्तूप, गोलाकार स्तूप, भित्त और खम्भे थे. इससे स्पष्ट होता है कि किसी बौद्घ विहारकी विशेषता होते हैं ।’ मौर्यने दावा किया है, ‘अयोध्यामें जिन ५० गड्ढोंकी खुदाई हुई है, वहां किसी भी मन्दिर या हिन्दू भवनके अवशेष नहीं मिले हैं ।’

बता दें कि उच्चतम न्यायालयमें अयोध्या भूमि विवाद प्रकरणपर सुनवाई तेज हुई है । माना जा रहा है कि न्यायालय इस प्रकरणपर शीघ्र सुनवाई कर निर्णय सुरक्षित रखकर कभी भी सुना सकता है ।

स्रोत : आजतक



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