जुलाई २४, २०१८
‘एटीएस’ और पश्चिम बंगाल पुलिसकी संयुक्त कार्यवाहीमें दो बांग्लादेशियोंको सूरजपुर कोतवाली क्षेत्रसे बन्दी बनानेसे कई प्रश्न उठने लगे हैं । इनमें सबसे बडा प्रश्न यह है कि कहीं स्वतन्त्रता दिवसपर आतंकियोंने दिल्ली या ‘एनसीआर’में कोई बडी आतंकी घटनाका षडयन्त्र तो नहीं कर रखा था ?, यद्यपि इस सम्बन्धमें कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है; लेकिन आतंकी दिल्लीसे सूरजपुर लौटे थे ।
‘एटीएस’ने सूचना दी है कि गुप्तचर विभागकी सूचनाके आधारपर सूरजपुर कोतवाली क्षेत्रके यामाहा तिराहेके पास से आतंकी रूबैल अहमद और मुसर्रफ हुसैनको बन्दी बनाया गया । दोनों ‘जमात-उल-मुजाहिद्दीन’ बांग्लादेशके सदस्य हैं । दोनोंको सूरजपुर कोतवालीमें ले जानेके पश्चात न्यायालयमें प्रस्तुत कर पांच दिनके ‘रिमाण्ड’पर लिया गया ।
दोनों आतंकी अन्य साथियोंके साथ बांग्लादेश पुलिसके दबावमें भागकर भारतमें आकर रहने लगे थे । जानकारी दी गई है कि दोनों कुछ दिवसोंसे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबादमें छिपकर रह रहे थे और कार्य भी कर रहे थे । इनके अन्य साथियोंके भी प्रान्त व निकटवर्ती क्षेत्रोंमें छिपे होनेकी आशंका है । अब तक जांच विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया हैं कि इनका यहां छिपनेका क्या उद्देश्य था ?
आरोपियोंने पूछताछमें बताया कि सोमवारको वे दिल्लीसे सूरजपुर क्षेत्रमें परिवहन वाहनके रास्ते पहुंचे थे । आरोपी आनन्द विहारसे नोएडाके ‘सेक्टर-३७’ और फिर वहांसे सूरजपुर पहुंचे थे । इसी मध्य उन्हें बन्दी बना लिया गया । १५ अगस्तसे पूर्व आरोपियोंका बन्दी बनाना षडयन्त्रका संकत लग रहा है । इसे लेकर अधिकारी व गुप्त विभाग चौकन्ना हो गई हैं ।
मेरठ मण्डल और पश्चिम उत्तरप्रदेशमें आतंकियोंका शरण लेनेकी शंका ऐसे ही नहीं है । यहां पूर्वमें कुछ बडे आतंकियोंके यहां शरण लेनेका दावा गुप्तचर विभाग कर चुके हैं । अब्दुल करीम टुण्डा हापुडके पिलखुवाका रहने वाला है । वहीं, आतंकी गुलाम रसूल, अबु सलेम और शकील भी खुर्जामें (बुलन्दशहर) शरण लेनेका प्रकरण उजागर हुआ था । वहीं, मेरठ व बिजनौरके नाम भी इसमें जुड चुके हैं ।
स्रोत : अमर उजाला
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