जुलाई २५, २०१८
उत्तर प्रदेशमें ‘निकाह हलाला’के नामपर एक मुस्लिम महिलासे उत्पीडनका प्रकरण सामने आया है । पीडिताकी परिवादपर पुलिसने ९ दोषियोंके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया है । यह प्रकरण प्रदेशके रामपुरका है । महिलाने कहा कि ‘निकाह हलाला’के नामपर उसके साथ पति सहित ४ लोगोंने दुष्कर्म किया । उन्होंने कहा, ‘पतिद्वारा ‘तलाक’ देनेके बाद तीन माहके लिए मेरा विवाह दूसरे व्यक्तिसे कराया गया था; लेकिन उसने दूसरी महिलासे विवाह कर लिया था ।’ पीडिताकी परिवादके पश्चात स्थानीय प्रशासन जागा और आरोपियोंके विरुद्ध ‘एफआईआर’ प्रविष्ट की । बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’के विरुद्ध उच्चतम न्यायालयमें याचिका दी गई है । शीर्ष न्यायालयने इस प्रकरणमें केन्द्र शासनको आदेश देकर उत्तर मांगा है । बुलन्दशहर निवासी फरजानाने उच्चतम न्यायालयमें इस व्यवस्थाको चुनौती दी थी । न्यायालयने उनकी याचिकाको मुख्य प्रकरणके साथ जोड दिया । इन सभी याचिकाओंपर संविधान पीठ सुनवाई करेगी । बता दें कि फरजानाका निकाह २५ मार्च, २०१२ को अब्दुल कादिर नामक व्यक्तिसे हुआ था । निकाहके एक वर्ष पश्चात फरजानाको ज्ञात हुआ कि कादिर पहलेसे ही विवाहित है । इसके पश्चात दोनोंमें मनमुटाव हो गया था । आक्षेप है कि कादिरने उन्हें ‘तीन तलाक’ दे दिया था ।
‘तीन तलाक’के प्रकरणपर न्यायालय पहले ही महिलाओंके अधिकारमें निर्णय दे चुका है । अब ‘निकाह हलाला’का प्रकरण उभरने लगा है । इसे भी शीर्ष न्यायालयमें चुनौती दी गई है, जिसपर संविधान पीठ सुनवाई करेगी । दबाव बढनेके पश्चात ‘ऑल गण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ने भी इसपर विचार करनेकी बात कही है । समितिकी ३१ जुलाईको बैठक होने वाली है । ‘इकोनोमिक टाइम्स’के अनुसार, ‘एआईएमपीएलबी’, ‘शरिया’के अनुसार ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’को संहिताबद्ध करनेपर विचार कर सकता है । दूसरी ओर, विधि आयोगने देशमें समान नागरिक संहिता लागू करनेके लिए देशभरमें विचार-विमर्श किया है । देशके कई भागोंसे ‘तलाक’ और ‘निकाह हलाला’के नामपर महिलाओंके साथ उत्पीडनके समाचार आते रहते हैं । ऐसेमें ‘तीन तलाक’पर न्यायालयका निर्णय आनेके पश्चात ‘निकाह हलाला’ जैसी कुप्रथाको भी समाप्त करनेकी मांग उठने लगी है ।
स्रोत : जनसत्ता
Leave a Reply