जुलाई ३०, २०१८
असममें ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन’ने (एनआरसी) अपना दूसरा प्रारूप (ड्राफ्ट) दिया है, जिसमें ४० लाख लोगोंको भारतीय नागरिकता नहीं मिली है ! वहीं २ कोटि ८९ लाख लोगोंको राज्यमें भारतीय नगरिक माना गया है । इसकी जानकारी ‘एनआरसी’के राज्य उप-सहायक (को-आर्डिनेटर) प्रतीत हजेलाने दी है । इस प्रारूपके आनेके पश्चात राजनीतिक उठापटक आरम्भ हो गई है । संसदके दोनों सदनोंमें निरन्तर हंगामा जारी है । लोकसभामें गृहमन्त्री राजनाथ सिंहने कहा कि मैं विपक्षसे पूछना चाहता हूं कि केन्द्र शासनका इसमें क्या हाथ है ? यह सबकुछ उच्चतम न्यायालयकी देख-रेखमें हो रहा है । इस प्रकारके संवेदनशील मुद्दोंपर राजनीति नहीं होनी चाहिए ।
वहीं राज्यसभामें काफी हंगामा हुआ जिसके कारण दोपहर २ बजे तकके लिए उच्च सदनकी कार्यवाहीको स्थगित कर दिया है ।
तृणमूल कांग्रेसके (टीएमसी) सासंदोंने इस सूचिको लेकर प्रश्न किए हैं । वहीं गृहमन्त्री राजनाथ सिंहका इस पूरे प्रकरणपर कहना है कि उच्चतम न्यायालयके आदेशपर राजनीति नहीं होनी चाहिए । टीएमसीके सांसद सौगत रॉयने आज आए एनआरसीके प्रारूपको लेकर राज्यसभामें स्थगन प्रस्ताव दिया । टीएमसी सासंदों और कुछ दूसरे सासंदोंने डेरेक ओ ब्रायनके नेतृत्वमें इस प्रकरणको लेकर हंगामा किया, जिसे सभापति वैंकेया नायडूने सम्भालनेका काफी प्रयास किया; लेकिन बादमें उन्होंने २ बजेतक के लिए राज्यसभा स्थगित कर दी ।
केन्दीय गृहमन्त्री राजनाथ सिंहने कहा, ‘कुछ लोग बिना कारण भयका वातावरण पैदा करनेका प्रयास कर रहे हैं । यह पूर्ण रूपसे निष्पक्ष ब्यौरा है । किसी भी प्रकारकी भ्रान्ति नहीं फैलाई जानी चाहिए । यह केवल प्रारूप है, ना कि अन्तिम सूचि । यदि किसीका नाम अन्तिम सूचिमें नहीं है तो वह विदेशी न्यायाधिकरणसे (ट्रिब्यूनल) सम्पर्क कर सकता है । किसीके भी विरुद्ध कोई प्रतिरोधी कार्यवाही नहीं की जाएगी; इसलिए भयभीत होनेकी कोई आवश्यकता नहीं है ।’
वहीं केन्द्रीय गृहराज्यमन्त्री किरण रिजिजूने सूचिको लेकर जारी राजनीतिक घमासानपर कहा कि शासन किसीके साथ भी अन्याय नहीं करेगा । उन्होंने कहा, ‘एनआरसीपर राजनीतिक हंगामा या अविश्वासका वातावरण बनाना अनुचित है । यह आदेश माननीय न्यायालयका था और जिनका नाम सूचिमें नहीं है, उनके ऊपर अभी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है । सबके पास दूसरा अवसर है; इसलिए बिना कारण असहज स्थिति बनाने से बचना चाहिए ।’
प्रारूपपर असम कांग्रेसके अध्यक्ष रिपुन बोराने कहा, ‘४० लाख नामोंको अयोग्य बता दिया गया है, जो बहुत बडी संख्या है और काफी आश्चर्यजनक भी है ! विवरणमें बहुत सारी अनियमितताएं हैं । हम इस प्रकरणको शासनके समक्ष और संसदमें उठाएंगे ! इसके पीछे भाजपाका राजनीतिक स्वार्थ भी है ।’
टीएमसीके सासंद एसएस रॉयने कहा, ‘केन्द्र शासनने जानबूझकर ४० लाख धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकोंको ‘एनआरसी’से हटा दिया है । इसका असमके आस-पासके विभिन्न राज्योंकी जनसांख्यिकीपर गम्भीर दुष्प्रभाव पडेगा । प्रधानमन्त्रीको सदनमें आना चाहिए और इसपर स्पष्टीकरण देनी चाहिए ।’
पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने असम ‘एनआरसी’के प्रकरणपर कहा, ‘कई लोगोंके पास आधार कार्ड और पासपोर्ट भी थे; लेकिन फिर भी उनका नाम प्रारूपमें नहीं था । उचित लेख-पत्रोंके पश्चात भी लोगोंको सम्मिलित नहीं किया गया । कई लोगोंको उनके उपनामके कारण भी बाहर किया गया । क्या शासन बलपूर्वक लोगोंको बाहर निकालना चाहता है ?’
स्रोत : अमर उजाला
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