घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ५)


घरकी वास्तुको स्वच्छ रखते समय निम्नलिखित तथ्योंका ध्यान रखें –
अ. अपने अन्नपूर्णा कक्षको (रसोई घरको) भी स्वच्छ रखें । चूल्हेकी स्वच्छतासे प्रशीतक (फ्रिज) तक, सभी वस्तुओंकी स्वच्छतापर ध्यान दें । अनावश्यक वस्तुको एकत्रित कर न रखें, अन्नपूर्णा कक्ष अर्थात माता अन्नपूर्णाका देवालय (मन्दिर) ही होता है; अतः वहांके स्वच्छतापर ध्यान दें । आज अनेक प्रकारके मानसिक रोगोंके पीछे अस्वच्छ एवं अपवित्र भोजनका ग्रहण करना है; इसीलिए इस कक्षकी स्वच्छतापर विशेष ध्यान दें । अन्नका एक भी दाना व्यर्थ (बर्बाद) न हो, इस प्रकार अन्नका सदुपयोग करें । अन्न ब्रह्म होता है, अन्नका तिरस्कार करना अर्थात सृष्टिके रचियताका तिरस्कार करना है ! बर्तन धोनेवाले ‘सिंक’को भी स्वच्छ रखें ।
आ. घरमें बाहरके पादत्राण (चप्पल) या चर्मके (चमडेके) पादत्राण पहनकर न घूमें । इससे वास्तुमें रज-तमके स्पन्दन फैलकर अशुद्धि निर्माण होता है । बाहरसे आनेपर पादत्राण बाहर ही उतारें एवं पांव धोकर ही अपने घरमें प्रवेश करें ।



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