‘एनआरसी’पर ममता बनर्जीने कहा, लोगोंको विभाजित किया जा रहा है, इससे देशमें गृहयुद्ध होगा !


जुलाई ३१, २०१८

असमके ‘नेशनल सिटिजन रजिस्टर’के (एनआरसी) प्रकरणपर देशकी राजनीतिमें भूचाल आया हुआ है । मंगलवारको संसदके मॉनसून सत्रके मध्य इस प्रकरणपर जमकर हंगामा हुआ । राज्यसभामें तो हंगामेके चलते बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहको अपना पक्ष ही नहीं रखने दिया । सभी विपक्षी दल इसपर शासनको घेर रहे हैं ।

तृणमूल कांग्रेसकी अध्यक्ष तथा पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने ‘एनआरसी’के प्रकरणपर शासनपर गम्भीर आरोप लगाए ! ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब’में आयोजित एक कार्यक्रममें ‘लव फॉर नेबर’ विषयपर बोलती हुए ममता बनर्जीने कहा कि ‘एनआरसी’ लागू करनेके पीछे राजनीतिक उद्देश्य है और ऐसा हम पश्चिम बंगालमें बिल्कुल नहीं होने देंगे । उन्होंने कहा कि भाजपा शासन इस प्रकरणपर देशको बांटनेका प्रयास कर रही है । इससे लोग आपसमें ही लडेंगे, रक्त बहेगा और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी ।

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जीने कहा कि वह ऐसा बंगालमें नहीं होने देंगे; क्योंकि बंगालमें हम हैं । उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि असमकी इस ‘एनआरसी’में पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमदके कुटुम्बका नाम नहीं है ! इसपर हम क्या कह सकते हैं, ऐसे सभी लोग हैं, जिनकी कई पीढियां भारतमें रह रही हैं और उनका नाम इस सूचिमें नहीं है ।”

पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्रीने कहा, “यदि बंगाली कहें कि बिहारी यहां (प. बंगालमें) नहीं रह सकता, दक्षिण भारतीय कहें कि उत्तर भारतीय उनके यहां नहीं रह सकते और यहीं बात उत्तर भारतके लोग दक्षिण भारतके लिए कहें, तो इस देश में क्या होगा ? इस देशके राज्योंका क्या होगा ?; लेकिन हमें ऐसा नहीं होने देना है; क्योंकि हम सब एक हैं, हमारे देशके कुटुम्ब है ।’

ममता बनर्जीने कहा कि केवल मतदान जीतनेके लिए लोगोंको पीडित नहीं किया जा सकता है । क्या आपको नहीं लगता कि जिन लोगोंका नाम ‘एनआरसी’में नहीं हैं, वे अपनी पहचानका एक भाग खो देंगे ? उन्होंने कहा, “आप यह क्यों नहीं समझते कि विभाजनसे पूर्व भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश एक ही थे, जो भी मार्च, १९७१ तक बांग्लादेशसे भारत आया था, वह भारतीय नागरिक है ।”

उन्होंने कहा कि भारतमें एक बदलावकी आवश्यकता है और विश्वकी भलाईके लिए यह बदलाव निश्चित ही २०१९ में आएगा ।

स्रोत : जी न्यूज



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