घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ८)


उत्तर-पूर्व (ईशान कोण), यह दिशा शेष सभी दिशाओंमें सर्वोत्तम दिशा मानी जाती है । वास्तु अनुसार घरमें इस स्थानको ईशान कोण कहते हैं । भगवान शिवका एक नाम ‘ईशान”’ भी है । यद्यपि भगवान शिवका आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशामें होता है; इसीलिए इस दिशाको ईशान कोण कहा जाता है । इस दिशाके स्वामी ग्रह बृहस्पतिऔर केतु माने गए हैं ।
* यह दिशा पूजा घरके लिए उत्तम स्थान होती है; क्योंकि इस कोणमें देवत्वका वास होता है; अतः पूजा घरमें सात्त्विकता निर्माण होनेमें भी अल्प समय लगता है । यदि ईशान कोणमें पूजा घर है तो उसके ऊपर या नीचे भी शौचालय नहीं बनाना चाहिए ।
* पूर्व दिशाके परिणाम बच्चोंके मनपर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं; अतः बच्चोंका शयन कक्ष व अध्ययन कक्ष ईशान कोणमें होना शुभ माना जाता है; इससे बच्चोंका पढाईमें मन लगता है और स्मरण किए गए तथ्य वे शीघ्र नहीं भूलते हैं; किन्तु उस कक्षमें पूजा घर न हो, यह ध्यान रखें अन्यथा शक्ति तत्त्वके बढ जानेसे बच्चोंका मन कई बार पढाईमें नहीं लगेगा; इसलिए पूजा घर और बच्चोंका कक्ष एक ही कक्षमें न रखें ! (क्रमश:)



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