‘रोगका उपचार करनेसे अच्छा है, रोग न हो, इसके लिए उपाय करना ।’ (Prevention is Better Than Cure) ऐसी एक कहावत है । यह केवल कहनेके लिए नहीं है । बडे होनेपर दुर्व्यसन न लगे, इसके लिए बच्चोंपर बचपन में ही सात्त्विक संस्कार डालना आवश्यक है । जब हम उन्हें बचपनमें, ‘कूडा मत करो, झूठ मत बोलो, किसीको मत मारो’, आदि मानसिक स्तरकी बातें सिखाते हैं, उसी समय उनसे आध्यात्मिक साधना करवा लेंगे, तो वे धीरे-धीरे सात्त्विक बनेंगे । आगे वे अनुचित बातें नहीं करेंगे । इसका लाभ यह होगा कि वे बडे होकर भ्रष्टाचार नहीं करेंगे, अनीतिपर नहीं चलेंगे, गुंडा-गर्दी आदि नहीं करेंगे । यदि सब ऐसा आचरण करने लगेंगे, तो पृथ्वीपर रामराज्यकी स्थापना हो जाएगी ।’- परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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