अगस्त ६, २०१८
देशके २१ शासकीय बैंकों और ३ बडे निजी बैंकोंने देशकी जनतासे न्यूनतम राशिके नामपर वर्ष २०१७-१८ में करीब ५००० कोटि रुपएका उपार्जन किया है । भारतके सबसे बडे शासकीय बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया’ने इस उपार्जनका आरम्भ किया था और ग्राहकोंपर अपने खातेमें न्यूनतम राशि न रखनेकी स्थितिमें कुछ शुल्क काटनेका आरम्भ किया था । ‘एसबीआई’ने इस प्रक्रियाका आरम्भ गत वर्ष अप्रैल, २०१७ से किया था और सभी बैंकोंद्वारा जमाकी गई कुल राशिका आधा भाग ‘एसबीआई’को मिला है ! उल्लेखनीय है कि इसके पश्चात भी ‘एसबीआई’को वर्ष २०१७-१८ में लगभग ६,५४७ कोटि रुपयोंकी हानि हुई है ।
अंकोंकी बात करें तो ‘द एशियन एज’के समाचारके अनुसार, न्यूनतम राशिके नाम पर भारतीय बैंकोंको कुल ४९८९.५५ कोटि रुपये प्राप्त हुए हैं, जिनमें से २४३३.८७ कोटि रुपये ‘एसबीआई’को मिले हैं और उसके पश्चात ‘एचडीएफसी’को मिला है, जिसके खातेमें ५९०.८४ कोटि रुपये आए हैं । २०१६-१७ से इस वर्ष इसमें कमी आई है । ‘एचडीएफसी’के पश्चात ‘एक्सिस बैंक’को ५३०.१२ कोटि मिले हैं। वहीं ‘आईसीआईसीआई बैंक’को ३१७.६ कोटिका लाभ हुआ है । बता दें कि ‘एसबीआई बैंक’ वर्ष २०१२ तक अपने ग्राहकोंसे खातेमें न्यूनतम राशि न रखने पर कुछ शुल्क लेता था; लेकिन बाद में इसको समाप्त कर दिया गया । ‘एसबीआई’ने अप्रैल, २०१७ से एक बार पुनः यह शुल्क आरम्भ किया था, यद्यपि शुल्ककी ऊंची दरको लेकर ‘एसबीआई’को आलोचनाएं भी झेलनी पडीं, जिसके चलते ‘एसबीआई’ने अक्टूबर, २०१७ को अपने शुल्कमें कुछ कटौती की । उल्लेखनीय है कि जो खाते ‘सेविंग’ अथवा ‘प्रधानमन्त्री जन-धन योजना’के अन्तर्गत खोले जाते हैं, उनमें न्यूनतम राशि रखनेकी कोई बाध्यता नहीं है । ‘आरबीआई’के नियमोंके अनुसार बैंक अपनी सेवाओंके बदले अपने ग्राहकोंपर कुछ शुल्क लगा सकते हैं और यह ‘न्यूनतम राशि’ इस नियमके अन्तर्गत ही लगाया गया है ।
स्रोत : जनसत्ता
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