पूजाघरकी नियमित स्थूल और सूक्ष्म स्तरोंपर शुद्धि करें –
पूजा घरकी स्थूल शुद्धि करें अर्थात वहां स्वच्छता एवं व्यवस्थितता रखें, इस हेतु हमने धर्मप्रसारके मध्य लोगोंके घरोंमें जो पूजा घरमें चूकें होती देखी है, वह बताती हूं, आप भी निरिक्षण करें, कहीं आपसे जाने-अनजाने ऐसी चूकें तो नहीं हो रही हैं ।
१. अनेक लोग अपने बैठक कक्षकी प्रतिदिन स्वच्छता करते हैं; क्योंकि उन्हें लगता है कि यदि कोई अतिथि अस्वच्छता देखेंगे तो क्या कहेंगे; किन्तु उसीप्रकार वे नियमित पूजाघरकी स्वच्छता नहीं करते हैं; क्योंकि देवता भी उन्हें देख रहे हैं, यह भाव उनमें नहीं होता है ।
मैंने कुछ घरोंमें पूजा घरोंमें जाले देखें हैं । यदि आपके पूजाघरमें कुछ ही दिनोंमें जाले लगते हैं तो इसका अर्थ है कि आपके वास्तुमें अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है; अतः ऐसे घरोंकी सूक्ष्म स्तरपर वास्तुकी शुद्धि अति आवश्यक होती है, इसे कैसे करना है, यह हम भविष्यके लेखोंमें बताएंगे । पूजाघरमें लगनेवाले जालेको तुरन्त हटाएं !
पूजाघरमें प्रतिदिन झाडू-पोछा करें । सम्भव हो तो उसे अपने सेवकसे न कराएं, स्वयं ही करें, इससे उस कृतिसे भाव निर्माण होनेमें सहायता मिलेगी । यदि पूजा घरकी भूमिको जलसे धो सकते हैं तो उसे कुछ दिवसों पश्चात धोया करें, इससे पूजाघरकी भूमिका पातालसे निर्माण होनेवाला काला आवरण नष्ट होता है । यदि मिट्टीका पूजा घर हो तो उसे प्रतिदिन देसी गायके गोबरसे लीपा करें, मिट्टीके पूजा घर बहुत ही सात्त्विक होते हैं । जो गांवमें रहते हैं और देसी गाय घरमें रखते हैं, उन्होंने पूजा घरकी भूमि मिट्टीकी ही रखनी चाहिए, इससे उसमें सात्त्विकता निर्माण होनेमें सहायता मिलती है । गोबरसे लिपे हुए स्थानपर अनिष्ट शक्तियोंका आक्रमण नहीं हो पाता है, यह मैं इसलिए बता रही हूं कि हमारे लेखोंके अनेक पाठक गांवोंमें भी रहते हैं तो उनके लिए यदि यह सम्भव है तो ऐसा करें और हिन्दू राष्ट्र आनेके पश्चात विश्वकी जनसंख्या, तीसरे विश्वयुद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, महामारी इत्यादिके कारण आधी हो जाएगी तो नगरोंके लोगोंके लिए ऐसा करना सम्भव होगा; इसलिए अभीसे यह जानकारी दे रही हूं ।
यदि पूजा घरकी भूमि मिट्टीकी न हो और वह सीमेंट, टाइल्स या मार्बलसे बनी हो तो पोछा लगते समय उसमें एक चम्मच देसी गायका गोमूत्र, चुटकी भर किसी यज्ञकी विभूति एवं थोडा सा मोटा नामक डालकर प्रतिदिन पोछा लगाएं । इसे पूजा करते समय पातालसे आनेवाली अनिष्ट लहरियों नियन्त्रित रहती हैं और पूजा करते समय मन एकाग्र होनेमें एवं देवत्व निर्माण होनेमें सहायता मिलती है ।
२. पूजा घरमें सूर्यके प्रकाश तथा नैसर्गिक हवाका कुछ समय मिलना अति आवश्यक है, इससे भी उस स्थानकी शुद्धि होनेमें सहायता होती है; अतः प्रातः काल कुछ घण्टोंके लिए पूजाघरके वातायन (खिडकियां) एवं द्वार खोल दें । अनेक लोग एक कोनेमें पूजा घर बना देते हैं और उसमें प्रकाश और नैसर्गिक हवाका आवागमन नहीं होता है, ऐसेमें पूजा घरका वास्तु कुछ काल उपरान्त दूषित हो जाता है । (क्रमश:)
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