अगस्त ६, २०१८
देशकी राजधानी दिल्लीमें स्थान-स्थानपर कूडेके ढेरपर उच्चतम न्यायालयने सोमवारको (६ अगस्त) कडी टिप्पणी की । न्यायालयने राज्यपालको डांट लगाते हुए कहा कि दिल्लीके कूडा प्रबन्धन संयन्त्र दिसम्बर तक आरम्भ होंगे, तकतक आप किसीके घरका कचरा किसी औरके घरके सामने फेंकना चाहते हैं ! न्यायालयने विरोध दिखाते हुए कहा कि क्यों न इस कचरेको राजनिवासके (एलजीका घर) बाहर ही फेंक दिया जाए ! न्यायालयने सोनिया विहारमें कूडा फेंकनेपर वहांके लोगोंके क्रोधको ठीक बताया । न्यायालयने कहा कि वहां साधारण व्यक्ति रहते हैं तो आप वहां कूडा फेंकना चाहते हैं ! न्यायालयने टिप्पणी की, “वहां सामान्य लोग रहते हैं तो आप उनके घरोंके पास कूडेका पहाड खडा करना चाहते हैं ।” इसके अतिरिक्त न्यायालयका क्रोध कूडेको मिला देनेपर भी थी । न्यायालयने कहा कि कूडेको भिन्न क्यों नहीं किया जा रहा है ? लोगोंको इसके बारेमें जागरूक किए जानेकी आवश्यकता है, जो इसका पालन नहीं करता है, उसपर अर्थदण्ड लगाया जाए !” इस प्रकरणकी अगली सुनवाई अब १७ अगस्तको होगी ।
बता दें कि दिल्लीमें कूडा प्रबन्धन नहीं होनेके कारण यहां कई स्थानोंपर ‘लैण्डफील साइट’ हैं, इन स्थानोंपर कूडोंके पहाड बन गए हैं । इन्हें हटानेमें शासकीय विभागके व्यवहारको देखते हुए कई संगठनोंने उच्चतमन्यायालयमें याचिका दी है । इससे पिछली सुनवाईके मध्य भी न्यायालयने राज्यपाल, दिल्ली और केन्द्रपर कडी टिप्पणी की थी और पूछा था कि वे यह बताएं कि लैण्डफिल साइटका कूडा कितने दिवसमें हटेगा ? इस मध्य न्यायालयने ‘लैण्डफील साइट’की ऊंचाईकी तुलना कुतुब मीनारसे की थी और कहा था कि कूडेके पहाड कुतुब मीनारसे मात्र ८ मीटर ही नीचे रह गए हैं !
स्रोत : जनसत्ता
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