आज स्त्रियां कहीं भी सुरक्षित नहीं है, न घरमें, न बाहर, न शासकीय आश्रित गृहोंमें ! सर्वत्र वासनान्ध असुर, मनुष्यका रूप धारण कर स्त्रीकी देहको नोचने हेतु तत्पर रहते हैं ! यह और कुछ नहीं महाविनाशकी पूर्वसूचना है !
विप्र (ब्राह्मण), धेनु (गाय), सुर (देवता) और सन्तकी रक्षाके लिए ईश्वर अवतार धारण करते हैं और इस सृष्टिका इतिहास कहता है कि पूर्वके युगोंमें एक स्त्रीके शीलके हरण मात्र प्रयास भी महायुद्धका कारण बना ! इस कालमें सम्पूर्ण विश्वमें प्रत्येक मिनिट कई स्त्रियोंका शील हरण प्रत्यक्षमें हो रहा है या उसका प्रयास हो रहा है, यह और कुछ नहीं महायुद्ध रुपी महाविनाशकी पूर्वसूचना है ! इस बार तीसरे विश्वयुद्धसे आरम्भ होनेवाला आपातकालमें महाकाल अपने विकराल रूप धारण कर, सारे वासनान्ध नराधमोंका संहार करेंगे और यह संहार व्यष्टि स्तरका नहीं, अपितु समष्टि स्तरका होगा और होना भी चाहिए; क्योंकि आज एक नहीं अनेक रावण हैं और कौरवोंकी संख्या तो करोडों नहीं अरबोंमें है ! स्त्री और बच्चोंको निरीह समझ अत्याचार करनेवाले नराधमों ! अपने मृत्युकी उलटी गिनती आरम्भ करो !; क्योंकि महाकालके ताण्डवके नृत्यकी ताल ब्रहमाण्डमें गूंजने लगी है !
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