उत्तिष्ठ कौन्तेय


पत्नीने मांगा घर खर्च, मुसलमानी सैनिकने पत्रमें लिखकर कहा ‘तलाक-तलाक-तलाक’
सेनामें तैनात मुसलमानी युवक विवाहके कुछ दिवस पश्चात ही अपनी पत्नीको दहेजके लिए कष्ट देने लगा । पत्नीने और दहेज लानेसे मना कर दिया तो उसे मारपीट कर घरसे निकाल दिया गया ! उसके पश्चात जब महिलाने घर-खर्च मांगा तो सैनिकने पत्रके माध्यमसे तलाकनामा भेजकर कह दिया अब तलाक समझना, अपने पास नहीं रखूंगा । पीडित महिलाने इसे स्वीकार करनेसे मना करते हुए विधानका (कानूनका) आश्रय (सहारा) लिया है ।
प्रतिदिन छपनेवाले तलाकसे सम्बन्धित समाचारोंसे यह कहा जा सकता है कि मुसलमानोंके लिए पति-पत्नीके सम्बन्धका कोई महत्त्व ही नहीं है ! वे अपनी पत्नीसे सम्बन्ध विच्छेद ऐसे करते हैं जैसे मानो पत्नी कोई मनुष्य है ही नहीं !
  जिस पन्थमें स्त्रियोंकी स्थिति ऐसी दयनीय हो, उस पन्थके लोगोंकी मानसिकता कितनी अमानवीय होगी यह समझमें आता है ! ऐसे अमानवीय अत्याचारोंके विरुद्ध अपना विरोध प्रकट करनेवाली स्त्रियोंको न्याय मिले, यह देशके शासक एवं प्रशासकवर्गका उत्तरदायित्व है ।



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