कोई भी व्यक्ति, महापुरुष अपने पुरुषार्थसे बनता है अर्थात अपनी कर्मठतासे बनता है, ऐसे महापुरुषोंके जन्म तिथि एवं मृत्यु तिथिपर अवकाश देना, उनकी कर्मठताका अपमान करने समान है ! हिन्दू राष्ट्रमें ऐसी तिथियोंपर सार्वजानिक अवकाश नहीं होगा अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र उस व्यक्तिको कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु प्रत्येक दिनकी अपेक्षा कुछ अधिक घण्टे राष्ट्र और समाजके उत्थान हेतु कुछ विशिष्ट कार्य करनेका प्रयास करेगा ! अवकाश तो अकर्मण्यताका पोषण करता है, इससे एक कर्मठ व्यक्तिके प्रति कृतज्ञता कैसे व्यक्त हो सकती है ?; अतः इस देशको महापुरुषोंके प्रति श्रद्धाञ्जलि व्यक्त करनेकी पद्धति भी सिखानी होगी ! आजका सामान्य व्यक्ति सार्वजनिक अवकाश होनेपर क्या करता है ?, कोई कहीं घूमने जाता है, कोई अपनी रुचि अनुसार चलचित्र देखता है तो कोई संगीत सुनता है तो कोई क्रिकेट देखता है; इससे राष्ट्रके मनुष्यबलकी क्षमता घटती है और ऐसे बहुतसे अवकाशोंसे राष्ट्रकी सकल घरेलू उत्पादमें (जीडीपीमें) गिरावट आती है ।
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