अगस्त २३, २०१८
उच्चतम न्यायालयने देशके सभी धर्मस्थलों और दानसे चलने वाले संस्थानोंमें स्वच्छता, सम्पति, प्रवेश और खातोंके मामलोंकी जांच करनेका आदेश दिया है । न्यायालयने कहा कि प्रान्तीय न्यायाधीश इन प्रकरणको लेकर आने वाली परिवादपर सुनवाई करें और न्यायालयको उनका विवरण भेजें । न्यायालयने यह भी बताया कि ऐसे प्रकरणको जनहित याचिकाके रूपमें निपटाए जाए । बता दें कि न्यायालयके इस आदेशकी सीमामें देशके सभी मन्दिर, मस्जिदें, गिरजाघर और बाकी धार्मिक स्थल व संस्थान आएंगे ।
जस्टिस आदर्श के. गोयल (सेवानिवृत्त) और एस.अब्दुल नजीरकी पीठने गत माह इस सम्बन्धमें यह आदेश जारी किया था । पीठने कहा था, “धार्मिक स्थलोंमें आने वालोंकी परेशानी, प्रबन्धनमें कमी, स्वच्छता, सम्पत्तिकी देखरेख और कुछ अन्य ऐसे प्रकरण हैं, जिन पर केन्द्र शासन और राज्य शासन ही नहीं, वरन् न्यायालयको भी विचार करना चाहिए ।”
देशमें धर्मस्थलोंकी संख्याके आधारपर न्यायालयने स्वतः संज्ञान लिया है । अंक विवरणके अनुसार, २० लाख से अधिक मन्दिर, तीन लाख मस्जिदें और सहस्त्रों गिरजाघर इस समय देशमें हैं; लेकिन पहले से ही तीन कोटि प्रकरण लम्बित पडे हैं, जबकि न्यायालयसे लेकर प्रान्तीय न्यायालयोंमें भारी संख्यामें भर्तियां होनी हैं । ऐसे में यह आदेश न्यायपालिकापर बोझ डाल सकता है । एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यमके अनुसार, अकेले तमिलनाडुमें सात सहस्त्र से अधिक प्राचीन मन्दिर हैं ।
पुरी स्थित जगन्नाथ मन्दिरकी सम्पत्तियों-सुविधाओंको लेकर भी ऐसी ही जांच कराई गई थी । मृणालिनी पाढी नामकी महिलाने तब इस प्रकरणमें जनहित याचिका प्रविष्ट की थी, जिसके पश्चात पीठने सभी धर्मस्थलों और संस्थानोंसे सम्बन्धित इस प्रकारकी जांचके लिए किसी श्रद्धालु अथवा व्यक्तिको परिवादकी अनुमति देने पर सोचा था ।
न्यायालयने कहा था कि जगन्नाथ मन्दिरमें सभी धर्मोंके लोगोंके लिए प्रवेश खोल देना चाहिए । बता दें कि वहां पर अहिन्दुओंके प्रवेशपर अनुमति नहीं है ।
स्रोत : जनसत्ता
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