नारियल तेलके निरर्थक शोधमें इसे हानिकारक बताने पर भारतीयोंने शोधकर्ताको लताडा


अगस्त २३, २०१८

अमेरिकाके हार्वर्ड विश्वविद्यालयके एक प्राध्यापकने विचित्र दावा किया है । उन्होंने नारियल तेलको स्वास्थ्यके लिए हानिकारक बताते हुए, इसकी तुलना विषसे की है ! जैसे ही यह बात भारतके कुछ लोगोंको सामाजिक प्रसार माध्यमपर ज्ञात हुई, उन्होंने इस पर प्राध्यापक और उनके दावेकी जमकर धज्जियां उडाई । कैरिन मिशेल्स हार्वर्डके ‘टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’में प्राध्यापक और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रेबर्ग’के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंशन एण्ड ट्यूमर एपिडेमेलॉजी’में संचालक हैं । ये दावे उन्होंने एक कार्यक्रममें ‘कोकोनट ऑइल एण्ड अदर न्यूट्रिश्नल एरर्स’ विषयपर चर्चा के दौरान किए।

डॉ. मिशेल्सने कहा, “हम लोग जो भी खाना खाते हैं, नारियलका तेल उनमें से सबसे हानिकारक होता है, जिसमें वसा होती हैं । ये शरीरको हानि पहुंचाती हैं ।” विशेषज्ञ परामर्श देते हैं कि अधिक वसा वाली चीजोंसे बचना चाहिए; क्योंकि इनके सेवनसे ह्दय रोग सदृश कई रोग पनप सकते हैं ।

मान्यता है कि नारियलका तेल स्वास्थ्यके लिए लाभदायक होता है । यह शरीर और बालोंमें लगाने और रसोईघरमें भोजन पकानेमें प्रयोग किया जा सकता है ।

गुरुवारको (२३ अगस्त) जब यह समाचार सामाजिक प्रसार माध्यमकेद्वारा भारतीयोंके सामने आई तो उन्होंने प्राध्यापक और उनके शोध कार्यको जमकर लताडा । लोग बोले कि शोधपर यह केवल पैसे और समयकी बर्बादी है । हम भारतीय खाने-पीनेके प्रकरणमें हार्वर्ड या किसी अन्य देशके शोधको क्यों मानते हैं ?

 

“इन तथाकथित शोधकर्ताओंकी मानकर ही आज सम्पूर्ण भारत रिफाइण्ड तेल सदृश विष घोल रहा है । भारतीयोंने पूर्वजोंके बताए संस्कारोंपर ही चलना चाहिए” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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