निधर्मी लोकतन्त्रने सात दशकमें इस देशकी यह स्थिति कर दी है कि आज सौ कोटिवाले इस हिन्दू बहुल देशमें कहीं कांवड यात्रापर आक्रमण कर कांवडियोंके साथ मारपीट की जाती है तो कहीं नवरात्रिमें मां दुर्गाके विसर्जनपर तो कहीं रामनवमीकी शोभाभायात्रापर धर्मान्धोंद्वारा पत्थर बरसाए जाते हैं ! क्या इसी दिनको देखने हेतु इस देशके लाखों सपूतोंने अंग्रेजोंसे महासंग्राम कर देशको स्वतन्त्र करने हेतु अपने प्राणोंकी आहूति दी थी ? इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु धर्म सापेक्ष हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अनिवार्य हो गया है !
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