अगस्त २६, २०१८
वर्ष २०१० के पश्चात इस वर्ष सबसे अधिक लगभग १३० युवाओंके विभिन्न आतंकी संगठनोंसे जुडनेके साथ जम्मू कश्मीरमें आतंकवादपर भयावह रूझान उभर रहा है और इनमें से अधिकतर नौजवान अलकायदासे वैचारिक सम्बन्ध रखने वाले समूहोंसे जुडे हैं ! अधिकारियोंके अनुसार ३१ जुलाईतक १३१ युवा विभिन्न आतंकी संगठनोंसे जुडे हैं । इसमें सबसे बडी संख्या दक्षिण कश्मीरके शोपियांकी है, जहां से ३५ युवा सम्मिलित हुए हैं ! गत वर्ष १२६ स्थानीय लोग इन गुटोंसे जुडे थे !
अधिकारियोंने बताया कि कई युवा ‘अंसार गजवत-उल-हिन्द’में सम्मिलित हो रहे हैं । यह समूह अलकायदाके समर्थनका दावा करता है और इसका नेतृत्व जाकिर रशीद भट करता है । वह पुलवामाके त्राल क्षेत्रके एक गांवका रहने वाला है । इस समूहकी स्वीकार्यता धीरे-धीरे बढ रही है; क्योंकि मूसा एकमात्र ऐसा आतंकी है जिसने हुर्रियत कांफ्रेंसके अलगाववादी नेताओंका प्रभाव नष्ट किया है और कश्मीरको राजनीतिक मुद्दा बतानेपर सर काटनेकी चेतावनी दी है ।
कश्मीर घाटीमें सुरक्षा स्थितिपर दृष्टि रखने वाले अधिकारियोंका मानना है कि ‘शरीयत या शहादत’के मूसाके नारेने पाकिस्तानके समर्थन वाले वर्षों पुराने नारेका स्थान ले लिया है । हिज्बुल मुजाहिद्दीनके आतंकी बुरहान वानीकी मृत्युके पश्चात इस २४ वर्षीय युवकने युवाओंको आकर्षित किया है । वानी २०१६ में मारा गया था ।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारीने कहा कि वह शिक्षाके साथ खेलमें भी अच्छा था और अन्तर राज्यीय कैरम प्रतियोगितामें उसने राज्यका प्रतिनिधित्व किया था । यह बडा कारण है कि वह घाटीमें कई नौजवानोंके लिए नायककी तरह उभरने लगा । माना जाता है कि वह यमन-अमेरिकी मूलके प्रचारक अनवार अल अवलाकीसे प्रभावित है, जो सितम्बर २०११ में अफगानिस्तानमें गठबन्धन बलके आक्रमणमें मारा गया था । मूसा मुख्य रूपसे अपने संगठनके लिए भर्तीपर ध्यान केन्द्रित कर रहा है और युवकोंको शस्त्र उठानेके लिए प्रेरित कर रहा है ।
अधिकारियोंने बताया कि प्रेरित करने वाली उसकी क्षमताके कारण ‘लश्कर-ए-तैयबा’ जैसा आतंकी संगठन भी तब भौंचक्का रह गया, जब वह अबू दुजानाको अपने समूहमें ले आया । अबू दुजाना मारा गया था । जम्मू कश्मीर पुलिसके अनुसार भले ही ‘अंसार गजवत उल हिन्द’का घाटीमें बहुत आधार नहीं हो; लेकिन गांव और कस्बेमें उसकी लोकप्रियता बढती जा रही है !
प्रतिबन्धित ‘आईएसआईएस’से सम्बन्धित ‘आईएसजेके’को लेकर भी युवाओंमें आकर्षण था; लेकिन इसके प्रमुख दाऊद सोफीके मारे जानेके पश्चात समूहका कोई नामलेने वाला भी नहीं है । सुरक्षा विभागके अधिकारियोंने कहा कि शोपियां, पुलवामा, अनन्तनाग, कुलगाम और अवन्तीपुरा वाले सबसे अशान्त दक्षिण कश्मीरमें सबसे अधिक युवा आतंकवादी संगठनोंमें सम्मिलित हो रहे हैं । कश्मीर घाटीमें इन पांच प्रान्तोंसे १०० से अधिक युवक विभिन्न आतंकी समूहमें सम्मिलित हुए हैं ।
राज्य विधानसभा और संसदमें प्रस्तुत अंक विवरणके अनुसार २०१० के पश्चात इस वर्ष यह शीर्षपर है ।
इससे ज्ञात होता है कि २०१० से २०१३ की तुलनामें वर्ष २०१४ के पश्चात घाटीमें शस्त्र उठाने वाले युवकोंकी संख्या बढती गई है । वर्ष २०१० से २०१३ तक यह क्रमश: ५४, २३, २१ और छह था । वर्ष २०१४ में यह संख्या बढकर ५३ हो गई और २०१५ में ६६ तथा २०१६ में यह ८८ तक चली गई ।
“जिस देशने इन्हें जीवन दिया, उसीके साथ शत्रुता यह किसी धर्मविहीन आतंकीका ही लक्षण है ! इन युवा आतंकियोंको शासन ढूंढकर सबके समक्ष मृत्युदण्ड दें व उदाहरण स्थापित करें” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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