प्रातःकाल यात्रामें निकलनेसे पूर्व स्नान करें


कुछ दिवस पूर्व एक दम्पति हमारे आश्रमसे प्रातःकाल साढे चार बजे अपने घर, रेलयानसे जानेवाले थे । मैंने देखा कि उनलोगोंने सवा चार बजे तक स्नान करनेका नियोजन नहीं किया था । मुझे उन्हें स्नान करके जानेके लिए कहना पडा ।  उनकी रेलयानसे यात्रा लगभग २६ घण्टेकी थी; तब भी उन्होंने स्नान करनेका नियोजन नहीं किया था  ! यह प्रथम बार नहीं हुआ है, ‘वैदिक उपासना पीठ’के आश्रममें आनेवाले अनेक युवाओंको मैंने बिना स्नान करते यात्रा करते देखा है; इसलिए आज यह प्रसंग आपको बता रही हूं ।  
यात्रा शुभ हो और यदि प्रात:काल आरम्भ करनी हो और सम्पूर्ण दिवस स्नानका अवसर नहीं मिलनेवाला हो तो स्नान अवश्य करके जाना चाहिए । यात्रासे पूर्व स्नान करना है, इसका इसका नियोजन एक दिवस पूर्व ही करें । स्नान एवं संक्षिप्त देवपूजन करके कुछ मुखमें डालकर अर्थात खाकर, यात्रा करें इससे आपकी यात्रा निर्विघ्न होगी । आपको बताया न कि सर्व सामान्य हिन्दुओंको धर्म और अध्यात्म नहीं, स्नान करना, स्वच्छ रहना, नियमोंका पालन करना, यह सब सिखाना पडता है ! धर्मकी इतनी ग्लानि हुई है ! ऐसेमें सगुण-निर्गुण, द्वैत-अद्वैतका सिद्धान्त क्या बताया जाए !
 सामान्य धर्माचरणका पालन नहीं करनेके कारण आजके युवा वर्गको अनिष्ट शक्तियोंका तीव्र कष्ट है  ।  



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