गुजरातके ‘माउण्ट कारमेल’ विद्यालयने बच्चोंके हाथसे काटी राखी, अभिभावकों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदने किया तीव्र विरोध
गुजरातके एक ‘माउण्ट कारमेल’ मिशनरी विद्यालयमें विद्यालय प्रशासनकी ओरसे बच्चोंके हाथोंसे राखी कटवानेके समाचार प्रकाशित हुआ है । अभिभावक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदने इसको लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं शासनने जांचके आदेश दिए हैं ।
गुजरातकी राजधानी गांधीनगरके सेक्टर – २१ में आई मिशनरी विद्यालय, माउण्ट कार्मलमें बुधवार, २९ अगस्तको तब अभिभावक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदने कार्यकर्ताओंने हंगामा कर दिया, जब यहां विद्यालयमें छात्रोंके हाथमें बांधी गई राखीको विद्यालयके शिक्षक और प्रशासनके माध्यमसे काट कर फेंक दिया गया ।
इससे पहले भी भरुचके एक विद्यालयमें छात्राओंके हाथोंमें हिन्दुव्रतके कारणसे लगाई मेहन्दी जब तक हाथोंसे न जाए, तब तक विद्यालय नहीं आनेको कहा गया । कुछ छात्राओंको विद्यालयसे निकाल देनेको लेकर तब अत्यधिक विरोध भी हुआ था ।
अभिभावकोंकी परिवाद (शिकायत) है कि ‘क्रिश्चियन मिशनरी’ विद्यालय होनेके कारण गत कई वर्षोंसे इसप्रकार राखीको लेकर विद्यालय बच्चोंको प्रताडित करते हैं; किन्तु इस बार उनके हाथोंसे राखी काटनेके कारण अभिभावक अत्यधिक क्रोधमें अभिभावक सीधे शिक्षामन्त्री भुपेन्द्रसिंह चुडासमाको मिलनेके लिए पहुंच गए । अभिभावकोंकी परिवाद सुननेके पश्चात स्वयं शिक्षा मन्त्रीने इस प्रकरणमें जांचके आदेश दिए ।
मिशनरी विद्यालय भारतमें शिक्षा देने हेतु नहीं अपितु धर्म परिवर्तन करनेके मुख्य उद्देश्यसे ही कार्य करते है, वे बच्चोंको शिक्षित करनेके बहाने, उन्हें हिन्दू धर्मसे विमुख कर ईसाई बनानेका कार्य करते है, ऐसे बच्चे भविष्यमें नामसे हिन्दू और वृत्तिसे ईसाई और पाश्चात्य संस्कृतिके प्रशंसक और पोषक बनते हैं । यदि बच्चोंको घरमें वैदिक संस्कार नहीं दिए जाते हैं तो जो मिशनरी विद्यालय जितना प्रसिद्ध होता है, उससे निकले विद्यार्थी हिन्दू धर्म और संस्कृतिसे उतने ही विमुख हो जाते है, आज भारतके अधिकांश तथाकथित आधुनिकतावादी, हिन्दू धर्मद्रोही और राष्ट्रद्रोही बुद्धिजीवी ऐसे ही विद्यालयोंकी उपज हैं । हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे हिन्दूद्रोही और राष्ट्रद्रोही विद्यालय नहीं होंगे ! – तनुजा ठाकुर(३०.८.२०१८)
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